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26/11 केस में हुए थे बरी फहीम अंसारी: नहीं मिला ऑटो का परमिट, बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Wed, 29 Apr 2026 04:06 PM IST
राकेश कुमार पीटीआई, मुंबई

सार

26/11 मुंबई हमले के आरोपों से मुक्त होने के बावजूद फहीम अंसारी की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। सुरक्षा और पुराने रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने उसे ऑटो चलाने का जरूरी सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया है, जिस पर हाईकोर्ट ने भी मुहर लगा दी है।
 
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बॉम्बे हाई कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मामले में बरी हो चुके फहीम अंसारी की याचिका को खारिज कर दिया है। अंसारी ने अपनी आजीविका चलाने के लिए ऑटो रिक्शा चलाने की अनुमति मांगी थी। इसके लिए उसे पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट की जरूरत थी। लेकिन अदालत ने पुलिस की ओर से सर्टिफिकेट न दिए जाने के फैसले को सही ठहराया है।
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अदालत ने क्या-क्या कहा?
जस्टिस एएस गडकरी और जस्टिस रंजीतसिन्हा भोंसले की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। पीठ ने अंसारी की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि संबंधित विभाग ने उसे सर्टिफिकेट देने से बिल्कुल सही इनकार किया था। इस मामले में कोर्ट बाद में विस्तृत आदेश जारी करेगा।

क्या है पूरा मामला?
फहीम अंसारी ने पिछले साल जनवरी में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उसने आरटीओ से ऑटो रिक्शा चलाने का बैज और परमिट मांगा था। इसके लिए अनिवार्य पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया गया था। लेकिन पुलिस ने उसे सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया। अंसारी ने आरटीआई के जरिए इसका कारण पूछा था। जवाब में अधिकारियों ने बताया कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ उसके कथित संबंधों के कारण यह प्रमाण पत्र नहीं दिया जा सकता।
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सरकार ने पिछले साल सितंबर में अंसारी की याचिका का कड़ा विरोध किया था। सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया था कि अंसारी अभी भी पुलिस की निगरानी में है। इसी आधार पर उसका सर्टिफिकेट रिजेक्ट किया गया था।

अंसारी की दलील और अतीत का रिकॉर्ड
फहीम अंसारी ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि उसे सभी अदालतों ने बरी कर दिया है। उसने कहा, 'याचिकाकर्ता कानूनी रूप से रोजगार पाने का हकदार है। उसके रास्ते में कोई कानूनी बाधा नहीं होनी चाहिए।' याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि सिर्फ इसलिए कि उस पर 26/11 का केस चला था, उसे नौकरी के अवसरों से वंचित नहीं किया जा सकता। यह उसके आजीविका के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।

बता दें कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले में 166 लोगों की जान गई थी। इस मामले में विशेष अदालत ने मई 2010 में अजमल कसाब को दोषी ठहराया था। लेकिन सबूतों के अभाव में फहीम अंसारी और सबाउद्दीन अहमद को बरी कर दिया गया था। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी रिहाई के फैसले को बरकरार रखा। हालांकि, अंसारी को उत्तर प्रदेश के एक अन्य मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। वह सजा पूरी करने के बाद 2019 में जेल से बाहर आया था।

लॉकडाउन के बाद शुरू हुई परेशानी
अंसारी ने बताया कि जेल से छूटने के बाद उसने मुंबई के एक प्रिंटिंग प्रेस में काम किया। कोरोना महामारी के दौरान वह प्रेस बंद हो गई। इसके बाद उसने मुंब्रा में काम किया, लेकिन वहां आय बहुत कम थी। फिर उसने ऑटो चलाने का मन बनाया। 1 जनवरी 2024 को उसे लाइसेंस तो मिल गया, लेकिन पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट के बिना वह कमर्शियल ऑटो नहीं चला सकता।
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