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Bofors: बोफोर्स कांड की जांच में आ सकता है नया मोड़, सीबीआई ने निजी जांचकर्ता माइकल हर्शमैन से मांगी जानकारी

Wed, 05 Mar 2025 11:25 AM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

माइकल हर्शमैन ने दावा किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने घोटाले की जांच को पटरी से उतार दिया था और उन्होंने सीबीआई के साथ बोफोर्स मामले से जुड़ी अहम जानकारी साझा करने की इच्छा जाहिर की थी। 
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सीबीआई - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अमेरिका को न्यायिक अनुरोध भेजकर निजी जांचकर्ता माइकल हर्शमैन से बोफोर्स मामले में जानकारी मांगी है। हर्शमैन ने 64 करोड़ रुपये के बोफोर्स रिश्वत मामले के बारे में अहम जानकारी भारतीय एजेंसियों के साथ साझा करने की इच्छा जताई थी। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

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फेयरफैक्स ग्रुप के प्रमुख हर्शमैन 2017 में निजी जासूसों के एक सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आए थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न प्लेटफॉर्म पर आरोप लगाया था कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने घोटाले की जांच को पटरी से उतार दिया था। उन्होंने कहा था कि वह सीबीआई के साथ जानकारी साझा करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि उन्हें 1986 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने विदेशों में भारतीयों की ओर से मुद्रा नियंत्रण कानूनों के उल्लंघन और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच व भारत के बाहर ऐसी संपत्तियों का पता लगाने के लिए नियुक्त किया गया था। इनमें से कुछ बोफोर्स सौदे से संबंधित थे।

एजेंसी ने वित्त मंत्रालय से मांगे थे दस्तावेज
सीबीआई ने वित्त मंत्रालय से भी संपर्क कर हर्शमैन की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेज मांगे थे और यह भी पूछा था कि क्या उन्होंने कोई रिपोर्ट पेश की, लेकिन उस समय के रिकॉर्ड एजेंसी को उपलब्ध नहीं कराए जा सके। एजेंसी ने कई इंटरव्यू में हर्शमैन के दावों पर गौर किया और 2017 में घोषणा की कि मामले की उचित प्रक्रिया के अनुसार जांच की जाएगी।
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जानकारी नहीं मिलने पर भेजा लेटर रोगेटरी
लेटर रोगेटरी की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि  आठ नवंबर 2023, 21 दिसंबर 2023, 13 मई 2024 और 14 अगस्त 2024 को अमेरिकी प्राधिकारियों को भेजे गए पत्रों और स्मरणपत्रों से कोई जानकारी नहीं मिली। लेटर रोगेटरी एक लिखित अनुरोध है जो एक देश की अदालत की ओर से किसी आपराधिक मामले की जांच या अभियोजन में सहायता प्राप्त करने के लिए दूसरे देश की अदालत को भेजा जाता है। इंटरपोल से किए गए अनुरोध का भी कोई परिणाम नहीं निकला।

जनवरी में मिली थी इजाजत
सीबीआई को 14 जनवरी को गृह मंत्रालय से अमेरिका को लेटर रोगेटरी भेजने की मंजूरी मिली थी। एजेंसी ने विशेष अदालत को इसकी जानकारी दी। अदालत ने 11 फरवरी को सीबीआई के लेटर रोगेटरी आवेदन को मंजूरी दे दी। विशेष अदालत ने लेटर रोगेटरी जारी करने के सीबीआई के आवेदन को मंजूरी देते हुए टिप्पणी की कि माइकल हर्शमैन की ओर से इंटरव्यू में किए गए दावों से संबंधित तथ्य का पता लगाने के लिए दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य एकत्र करने के लिए अमेरिका में जांच करना आवश्यक है।

बोफोर्स सौदे में नेताओं और रक्षा अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप...
स्वीडन के एक रेडियो चैनल ने आरोप लगाया था कि बोफोर्स सौदे को हासिल करने के लिए भारत के राजनीतिक नेताओं और रक्षा अधिकारियों को रिश्वत दी गई थी। इसके तीन साल बाद सीबीआई ने 1990 में मामला दर्ज किया था। इन आरोपों ने तत्कालीन राजीव गांधी सरकार के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी थी और विपक्षी दलों ने कांग्रेस पर निशाना साधने के लिए इसका इस्तेमाल किया था।

1,437 करोड़ रुपये का था सौदा
यह घोटाला स्वीडिश कंपनी बोफोर्स के साथ चार सौ 155 मिमी फील्ड हॉवित्जर तोपों की आपूर्ति के लिए 1,437 करोड़ रुपये के सौदे में 64 करोड़ रुपये की रिश्वत के आरोपों से संबंधित था। इन तोपों ने करगिल युद्ध के दौरान भारत की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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