भारत के सभी हवाईअड्डों पर जांच के लिए फिलहाल मेटल डिटेकटर्स का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अप्रैल 2020 से इनका स्थान बॉडी स्कैनर्स ले लेंगे। ये कहना है विमानन सुरक्षा नियामक का। नियामक ने एयरपोर्ट ऑपरेटरों को मेटल डिटेक्टरों को बेहतर तकनीक से बदलने के निर्देश भी दे दिए हैं।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार नागर विमानन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) ने एयरपोर्ट ऑपरेटर्स और सुरक्षा एजेंसियों से कहा है कि सभी हवाईअड्डों पर जांच की जाने वाली जगहों में इन डिवाइसों को इंस्टॉल किया जाए। बॉडी स्कैनर बिना तलाशी के ही किसी भी सामान का पता लगा लेगा।
हालांकि जांच के लिए लोगों को विकल्प दिया जाएगा। स्वास्थ्य के आधार पर भी लोगों को जांच के लिए बॉडी स्कैनर से छूट दी जाएगी। ऐसे लोगों की जांच डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (डीएफएमडी) से की जाएगी। अतिसंवेदनशील हवाईअड्डों के ऑपरेटरों को मेटल डिटेक्टर की जगह बॉडी स्कैनर को इंस्टॉल करने के लिए एक साल का समय दिया गया है। वहीं बाकी एयरपोर्ट को दो साल का समय दिया गया है।
वर्तमान में भारत के 105 हवाईअड्डों में से 28 को अतिसंवेदनशील माना गया है। इसमें दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, जम्मू एवं कश्मीर, चेन्नई, उत्तर पूर्व के हवाई अड्डे शामिल हैं। 56 हवाईअड्डों को संवेदनशील माना गया है। 61 हवाईअड्डों की सुरक्षा का काम केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) को सौंपा गया है।