दूसरे चरण के सैलरी डे पर उमड़ने वाली भीड़ से निपटने के लिए बैंकों ने कमर कस ली है। इस बात की पूरी कोशिश है कि एटीएम और बैंकों में उमड़ने वाली भीड़ को खाली हाथ लौटने को मजबूर न होना पड़े। गौरतलब है कि कई संस्थान अपने कर्मचारियों को हर महीने सात तारीख को सैलरी देते हैं। नोटबंदी के बाद से बैंकों में नकदी संकट बनी हुई है। कई शाखाओं में स्थिति यह है कि वे खाता धारक को हर सप्ताह 24 हजार निकासी की सुविधा देने के आरबीआई के आदेश पर भी अमल नहीं कर पा रहे हैं।
देश के सभी हिस्सों में एटीएम के बाहर भी लंबी कतार दिख रही है, इस वजह से जिन एटीएम में कैश डाला जा रहा है वह भी जल्दी ही खाली हो जा रहे हैं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि बुधवार को दूसरे चरण का सैलरी डे है। ऐसे में बैंकों के बाहर कतार और बढ़ने की पूरी संभावना है।
उनका कहना है कि बैंकों की तरफ से इस बात की पूरी तैयारी है कि वे ग्राहकों की मांग को पूरी कर सकें। एक्सिस बैंक के कार्यकारी निदेशक राजेश दहिया ने बताया कि जिन शाखाओं में निकासी का दबाव अधिक है उन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एटीएम के संबंध में उन्होंने कहा कि 95 फीसदी एटीएम में सुधार किया जा चुका है। अब सिर्फ नकदी डालने की व्यवस्था में कमी की वजह से संकट है।
एटीएम में दिन में एक बार ही नकदी डाली जा रही है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ दिन बैंकों पर दबाव इसी तरह बना रहेगा। बैंक अधिकारियों के अनुसार सैलरी डे की भीड़ 7-10 दिसंबर तक बनी रहेगी। एसबीआई के प्रबंध निदेशक रजनीश कुमार ने कहा कि सैलरी और पेंशन की भीड़ अगले 5-7 दिन तक रहेगी। बैंकों में कम पैसे दिए जाने के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा सिर्फ इसलिए किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोगों को नकदी मिल सके। बैंक अधिकारियों का कहना है कि कुछ बैंक ग्राहकों को 2000 रुपये ही दे पा रहे हैं, जबकि कुछ बैंक 10-12 हजार का भुगतान कर रहे हैं।