देश की वैभवशाली नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) प्रशासन ‘ताजमहल’ पर फिदा है। चौकिए नहीं, हम आगरा के ताजमहल की नहीं बल्कि मुंबई में गेट वे ऑफ इंडिया के सामने समुंदर के किनारे बने आलीशान ताजमहल होटल पैलेस की बात कर रहे हैं।
बीएमसी ने होटल ताज के लिए करोड़ों रुपये शुल्क माफी देने की तैयारी की है। यद्यपि वैश्विक कोरोना महामारी संकट के कारण बीएमसी खुद आर्थिक संकट में है और तिजोरी खाली है। फिर भी बीएमसी ने बड़ा दिल दिखाया है।
बीएमसी मुंबई में हर चीज के लिए टैक्स लेती है। सड़क से लेकर फुटपाथ, घर से लेकर पानी, बिजली, सीवरेज आदि अनेकों तरह के टैक्स वसूलती है। बीएमसी के इसी टैक्स की चपेट में पंचसितारा होटल ताजमहल पैलेस भी है।
ताजमहल होटल का साल 2009 से लेकर जनवरी 2020 तक फुटपाथ व सड़क का करोड़ों रुपये शुल्क बाकी है। इसे बीएमसी माफ करने के लिए तैयार हुई है। इसके लिए बीएमसी की स्टैंडिंग कमेटी (स्थाई समिति) में एक प्रस्ताव आया है जिसमें ताजमहल होटल के सामने फुटपाथ का शत प्रतिशत व सड़क का 50 प्रतिशत शुल्क माफ करने का प्रस्ताव है।
26-11 आतंकी हमले के बाद से सड़क का इस्तेमाल कर रहा है ताज
मुंबई में 26/11 आंतकी हमले में होटल ताजमहल सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ था। इस घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर होटल ने सामने की सड़क व फुटपाथ को बैरिकेड कर किसी के भी इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है। तब से उस जगह का इस्तेमाल होटल मैनेजमेंट ही कर रहा है।
जनवरी 2009 से जनवरी 2020 तक फुटपाथ के इस्तेमाल में होटल पर बीएमसी का 8,85,63,222 रुपये और जून 2009 से जनवरी 2020 तक 1,33,5600 रुपये सड़क का शुल्क बाकी है।
गरीबों की नहीं उद्योगपतियों की फिक्रमंद है प्रशासन - रविराजा
बीएमसी में विपक्ष ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। विपक्ष के नेता रविराजा ने कहा कि गरीबों के पानी का बिल माफ करने में बीएमसी को परेशानी हो रही है, जबकि बड़े उद्योगपतियों के करोड़ों माफ करने में कोई संकोच नहीं हो रहा है। हम कोरोना संकट का सामना कर रहे हैं।
फिक्स डिपॉजिट तोड़ कर बीएमसी स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च कर रही है। ऐसे समय में किसी होटल या उद्योगपति का शुल्क माफ करना गलत है। मैं इसका कड़ा विरोध करूंगा।
तो बिगड़ सकता है शिवसेना का गणित
बीएमसी में शिवसेना की सत्ता है। हालांकि मुख्य विपक्षी दल भाजपा है। लेकिन तकनीकी रूप से विपक्ष के नेता का पद कांग्रेस के पास है जो बीएमसी में संख्याबल के लिहाज से तीसरी बड़ी पार्टी है।
शिवसेना-भाजपा में अनबन के कारण कांग्रेस-एनसीपी-सपा पार्षदों के समर्थन से शिवसेना बीएमसी में निश्चिंत होकर काम कर रही है। लेकिन ताज को शुल्कमाफी दिए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस का मुखर विरोध है। ऐसी स्थिति में यदि स्थायी समिति में वोटिंग की नौबत आई तो शिवसेना का गणित गड़बड़ा सकता है।