देश की सबसे बड़ी और सबसे अमीर महानगरपालिका बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के चुनाव से पहले राजनीति गरमा गई है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साफ कहा है कि मुंबई का अगला मेयर सत्तारूढ़ महायुति से होगा और वह हिंदू और मराठी होगा। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
मुंबई महानगरपालिका के 227 सदस्यीय सदन के लिए मतदान 15 जनवरी को होना है, जबकि नतीजे 16 जनवरी को आएंगे। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सभी दल मेयर पद को लेकर आक्रामक रुख अपना रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह टिप्पणी एक सवाल के जवाब में दी, जिससे साफ संकेत मिला कि भाजपा नेतृत्व वाली महायुति इस पद को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।
बयान से क्यों बढ़ा विवाद?
यह मुद्दा तब और उछला जब मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम के एक बयान पर सियासी हलचल मच गई। इसके बाद शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी मनसे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। हाल ही में उद्धव ठाकरे के साथ मंच साझा करने के बाद राज ठाकरे ने भी कहा था कि मुंबई का मेयर मराठी ही होगा।
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महायुति का सख्त संदेश
मुख्यमंत्री फडणवीस के बयान को भाजपा का सियासी दांव माना जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुंबई का नेतृत्व महायुति के पास रहेगा। इससे साफ है कि पार्टी मेयर पद को अपनी राजनीतिक पहचान और रणनीति से जोड़कर देख रही है। यह बयान चुनावी माहौल को और धार देने वाला माना जा रहा है।
अन्य नेताओं के बयान पर सफाई
पूर्व मंत्री कृपाशंकर सिंह के उत्तर भारतीय मेयर से जुड़े बयान पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह टिप्पणी मुंबई के संदर्भ में नहीं थी और वह पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता भी नहीं हैं। फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग नगर निगमों की परिस्थितियां अलग होती हैं और मुंबई को लेकर पार्टी का रुख बिल्कुल साफ है।
चुनाव से पहले तेज होती राजनीति
15 जनवरी को राज्य की 29 नगर निगमों में चुनाव होने हैं, जिनमें बीएमसी सबसे अहम मानी जा रही है। मेयर पद को लेकर दिए जा रहे बयानों से साफ है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होगा। सभी दल अपने-अपने समर्थकों को साधने में जुट गए हैं और मुंबई की सियासत एक बार फिर गरमाने लगी है।
मराठी साहित्य सम्मेलन में फोन पर क्या बोले सीएम फडणवीस?
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शुक्रवार को खुलासा किया कि 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के दौरान मंच पर बार-बार फोन पर बात करने की वजह नगर निकाय चुनावों में बागी उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने के लिए मनाना था। उन्होंने कहा कि आम तौर पर वह मंच पर रहते हुए फोन पर बात नहीं करते, लेकिन यह नामांकन वापसी का आखिरी दिन था और सभी दलों को बगावत की समस्या झेलनी पड़ रही थी। इसी कारण उन्हें बागी प्रत्याशियों से लगातार बात करनी पड़ी।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि फोन कॉल्स के बावजूद वह मंच से हो रहे भाषणों पर पूरा ध्यान दे रहे थे। साहित्य सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने मराठी भाषा और साहित्य के महत्व पर जोर दिया और कहा कि लेखकों व विचारकों का काम समाज को दिशा देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साहित्यिक संस्थानों में किसी तरह का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होगा। फडणवीस ने कहा कि साहित्य सृजन केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं को जागृत करने के लिए होता है और रचनात्मक आलोचना को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया जाना चाहिए।
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