शोध के मुताबिक अगर घने अंधेरे में कोई घंटों तक मोबाइल चलाता है तो एक समय के बाद उसे दिखना भी बंद हो सकता है। इस तरह के काफी मामले चिकित्सकों के सामने अब आने लगे हैं।कई बार टेंपरेरी ब्लाइंडनेस यानि क्षणिक अंधेपन की समस्या भी देखने को मिली है।
मोबाइल को लगातार देखते रहने के दौरान हम पलक झपकाना बिल्कुल ही बंद कर देते हैं और इसका नतीजा यह होता है कि हमारी आंखें सूख जाती है यानि ड्रायनेस होती है और इनमें खुजली होने लगती है। इसी से हमारी आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
स्मार्टफोन पर ज्यादा काम करने से आंखों में दर्द भी पैदा हो सकता है और आंखे खराब भी हो सकती है।
स्मार्टफोन की स्क्रीन को ज्यादा देर और लगातार देखने के बाद रात को जब सोने जाते है तो नींद नहीं आती। इसके पीछे की वजह मेलाटोनिन है, स्मार्टफोन हानिकारक नीली रोशनी छोड़ता है जो आपके दिमाग को संकेत पहुँचाती है और यह मेलाटोनिन बनाना बंद कर देता है। मेलाटोनिन एक केमिकल होता है जो हमारे शरीर में बनता है और हमें सोने में मदद करता है।
उपाय
1 स्मार्टफोन चलाते वक्त पलके झपकाना बिल्कुल भी नहीं भूलें। जब आप स्मार्टफोन चला रहे हों एक मिनट के अन्दर 15 से 20 बार पलकों को जरुर झपकायें ताकि आंखों में ड्रायनेस ना हो।