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स्मार्टफोन से निकलने वाली ब्लू लाइट है खतरनाक, छीन सकती है आपकी आंखों की रोशनी 

Sat, 18 Aug 2018 01:25 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला
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मोबाइल ब्लू लाइट
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आपकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है आपका स्मार्टफोन, घर से लेकर ऑफिस तक और बिल भुगतान करने से लेकर ऑनलाइन मूवी देखने के लिए भी आप अपने फोन पर ही निर्भर हैं। फोन आपके स्टेटस को भी झलकाता है इसलिए अब ज्यादा से ज्यादा फीचर्स और चमक वाले फोन खरीदने के लिए जम कर खर्च करते हैं।लेकिन यही चमक आपको अंधेरे की तरफ भी धकेल सकती है।   
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मैक्यूलर डिजनरेशन
जिस तरह से युवा स्मार्टफोन के आदि होते जा रह हैं ,हर वक्त फोन की ब्लू लाइट उनकी आंखों पर पड़ती हैं जो रेटिना के लिए बेहद नुकसानदेह है। मोबाइल की लाइट हमारे रेटिना को नुकसान पहुंचाती है और देखने की क्षमता को भी कम करती है।ब्लू लाइट आंखों के फोटोरिसेप्टर सेल्स में जहरीले रासायनिक मॉलिक्यूल को ट्रिगर करती है जो सेल को मार देते हैं।आंखों की इस समस्या को मैक्यूलर डिजनरेशन नाम की गंभीर बीमारी बताया गया है जिसका कोई इलाज भी नहीं है। 

अंधेरे में माबोइल चलाने से इसका सबसे ज्बुयादा बुरा असर रेटीना पर पड़ता है। इस तरह से रेटीना का मैक्यूलर एरिया तीखी रोशनी की वजह से प्रभावित होता है। पीड़ित व्यक्ति अगर सुबह उठने की कोशिश करता है तो उसको दिखना बंद हो जाता है।
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शोध के तथ्य

शोध के मुताबिक अगर घने अंधेरे में कोई घंटों तक मोबाइल चलाता है तो एक समय के बाद उसे दिखना भी बंद हो सकता है। इस तरह के काफी मामले चिकित्सकों के सामने अब आने लगे हैं।कई बार टेंपरेरी ब्लाइंडनेस यानि क्षणिक अंधेपन की समस्या भी देखने को मिली है।

मोबाइल को लगातार देखते रहने के दौरान हम पलक झपकाना बिल्कुल ही बंद कर देते हैं और इसका नतीजा यह होता है कि हमारी आंखें सूख जाती है यानि ड्रायनेस होती है और इनमें खुजली होने लगती है। इसी से हमारी आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

स्मार्टफोन पर ज्यादा काम करने से आंखों में दर्द भी पैदा हो सकता है और आंखे खराब भी हो सकती है।

स्मार्टफोन की स्क्रीन को ज्यादा देर और लगातार  देखने के बाद रात को जब सोने जाते है तो नींद नहीं आती। इसके पीछे की वजह मेलाटोनिन है, स्मार्टफोन हानिकारक नीली रोशनी छोड़ता है जो आपके दिमाग को संकेत पहुँचाती है और यह मेलाटोनिन बनाना बंद कर देता है। मेलाटोनिन एक केमिकल होता है जो हमारे शरीर में बनता है और हमें सोने में मदद करता है।

उपाय

1 स्मार्टफोन चलाते वक्त पलके झपकाना बिल्कुल भी नहीं भूलें। जब आप स्मार्टफोन चला रहे हों एक मिनट के अन्दर 15 से 20 बार पलकों को जरुर झपकायें ताकि आंखों में ड्रायनेस ना हो।

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2 स्मार्टफोन चलाते वक्त हर 20 मिनट बाद थोड़ी देर के लिए 20 फीट की दूरी पर अपने अलग रख दें ,ऐसा करने से भी आंखों को काफी राहत मिलती है।

3 आमतौर पर आदमी अपने स्मार्टफोन को 8 इंच की दूरी पर चलाता है, कोशिश करें की ज्यादा से ज्यादा दूरी पर फोन हाथ में लेके चलायें।

4 अगर स्मार्टफोन पर हर वक्त काम करना आपकी मजबूरी है तो चश्मा बनवा लेना चाहिए जो खतरनाक ब्लू लाइट से आंखों का सीधा संपर्क रोके।


 
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