देश में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने एक बड़ा खुलासा किया है। अनिल देशमुख ने प्लाज्मा की कालाबाजारी पर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि डार्क नेट पर 10 लाख रुपए प्रति लीटर प्लाज्मा बिक रहा है।
मुंबई और आसपास के इलाकों में प्लाज्मा रैकेट काम कर रहा है। यह रैकेट लोगों को डार्क नेट पर अपने आप को कोरोना वायरस संक्रमित मरीज बताता है और प्लाज्मा देने के लिए जरूरतमंदों से बड़ी रकम वसूलता है। राज्य सरकार ने मुंबई पुलिस और साइबर सेल को जांच के आदेश दे दिए हैं।
दिल्ली में प्लाज्मा थेरेपी में धोखाधड़ी के बाद सतर्क हुई महाराष्ट्र सरकार
दिल्ली में प्लाज्मा थेरेपी के नाम पर हुई धोखाधड़ी के बाद महाराष्ट्र सरकार भी सतर्क हुई है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि ऐसे में कोरोना मरीजों को सिर्फ सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पतालों में जहां पर प्लाजमा थेरेपी की सुविधा उपलब्ध हो, वहीं पर इलाज करवाना चाहिए। गैर मान्यता प्राप्त अस्पतालों में प्लाजमा थेरेपी के लिए कोरोना के मरीज बिल्कुल ना जाएं।
हाल ही में महाराष्ट्र में कोरोना के लिए सबसे कारगर इंजेक्शन रेमडेसिवीर की भी कालाबाजारी की खबरें सामने आई थी। जहां पर खुद फूड एंड ड्रग्स विभाग के मंत्री राजेंद्र शिंगणे ने मुंबई के कुछ मेडिकल स्टोर्स पर औचक निरीक्षण किया था और छानबीन की थी। उन्होंने खुद इस बात को स्वीकार भी किया था कि राज्य में इस दवा की भारी किल्लत है। इस दवा को सभी अस्पतालों में भरपूर मात्रा में सप्लाई करने के लिए दवा को बनाने वाली सभी कंपनियों से बातचीत शुरू है और खरीदने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। रेमडेसिवीर की कालाबाजारी करते हुए मुंबई से सटे नालासोपारा में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया था।
क्या है डार्क नेट
डार्क नेट इंटरनेट का वह हिस्सा है जिसे आमतौर पर प्रयोग किए जाने वाले सर्च इंजन से एक्सेस नहीं किया जा सकता है। इसका इस्तेमाल मानव तस्करी, मादक पदार्थों की खरीद और बिक्री, हथियारों की तस्करी जैसी अवैध गतिविधियों में किया जाता है। इंटरनेट की इस काली दुनिया को कोई ‘डार्क वेब’ कहता है तो कोई ‘डीप वेब’। यहां अवैध हथियारों और ड्रग्स के सौदे होते हैं।