ब्रिटेन की तरह भारत में भी वैक्सीन लेने के बाद रक्त स्राव और थक्के जमने की घटनाएं सामने आई हैं। अभी तक सरकार इन घटनाओं से इनकार कर रही थी लेकिन सोमवार को टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभावों को लेकर गठित राष्ट्रीय टीम ने इसकी पुष्टि की है।
इनके अनुसार देश में अप्रैल तक वैक्सीन लेने के बाद 23 हजार प्रतिकूल प्रभाव की घटनाएं मिली हैं जिनमें से 498 लोगों में गंभीर असर भी दिखाई दिए हैं। जब इन मरीजों में चिकित्सकीय स्थिति को लेकर समीक्षा की गई तो पता चला कि 26 मरीजों में रक्तस्राव और थक्के जमने की शिकायत मिली है। इन सभी लोगों ने कोविशील्ड टीका लिया था। कोवाक्सिन लेने वालों में इस तरह का कोई प्रभाव नहीं मिला है। हालांकि टीकाकरण के आंकड़ों से तुलना करने पर टीम को पता चला कि देश में 10 लाख कोविशील्ड की खुराक लेने वालों में 0.61 को ही यह शिकायत हुई है।
टीम के अनुसार इस साल तीन अप्रैल तक 7,54,35,381 लोगों को टीका लगा था जिनमें से 6,86,50,819 ने कोविशील्ड और 67,84,562 ने कोवाक्सिन टीका लिया था। उस दौरान यूके में वैक्सीन लेने के बाद रक्तस्राव और खून के थक्के जमने की शिकायतें सामने आई थीं। तभी राष्ट्रीय टीम ने इन मामलों की समीक्षा करना शुरू कर दिया था। उस दौरान 65,944,106 पहली और 9,491,275 लोग दूसरी खुराक ले चुके थे। समीक्षा के दौरान पता चला कि इनमें से 23 हजार लोगों ने वैक्सीन लगने के बाद परेशानी होने की शिकायत दी है। यह सभी शिकायतें 753 में से 684 जिलों में कोविन वेबसाइट के जरिए दर्ज की गईं।
ब्रिटेन की तुलना में बेहद कम
इस मामले में स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यूके में 10 लाख लोगों पर चार ऐसे मामले दर्ज किए गए थे। जर्मनी में 10 लाख में से 10 लोगों को वैक्सीन लेने के बाद रक्तस्राव और खून के थक्के जमने की शिकायत देखने को मिली है। भारत में यह आंकड़ा 0.61 ही है। अब तक देश में 16.42 करोड़ से अधिक कोविशील्ड की खुराक दी जा चुकी हैं। इसलिए सरकार लगातार इन मामलों की निगरानी कर रही है।
लोगों ने शिकायतें भी की हैं कम
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में प्रतिकूल घटनाएं इसलिए भी सरकारी आंकड़ों में कम है क्योंकि लोगों ने वैक्सीन लेने के एक या दो दिन बाद दिक्कत होने पर अस्पताल में इलाज कराया है। उन्होंने कोविन वेबसाइट या फिर टीकाकरण के नोडल अधिकारी से संपर्क ही नहीं किया। आईसीएमआर ने पिछले महीने ही कोरोना जांच के फार्म में वैक्सीन का विकल्प दिया था। इसलिए भी यह आंकड़ा कम हो सकता है।
टीकाकरण के प्रतिकूल असर देखने वाली राष्ट्रीय टीम के दो सदस्यों ने भी इस पर सहमति जताई है। इनका कहना है कि 16 करोड़ से ज्यादा लोगों को कोविशील्ड दिया जा चुका है। कई ऐसे भी लोग हैं जिन्हें वैक्सीन लेने के बाद भी स्थिति बिगड़ी और आईसीयू तक पहुंचे हैं। ऐसे मामलों की समीक्षा की जा रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षित है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ केस में दिक्कत आती है तो उसका इलाज भी उपलब्ध है।