राष्ट्रीय राजधानी के सबसे सुरक्षित क्षेत्र में हाई अलर्ट के बीच इस्राइली दूतावास के करीब बम धमाके ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली पुलिस ने इसे भले ही सनसनी फैलाने का प्रयास बताया है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां ईरान और इस्राइल के बीच चल रही तनातनी के एंगल की भी अनदेखी नहीं करना चाहती हैं।
इस बात की जांच की जा रही है कि कहीं 2012 में दिल्ली में ही इस्राइली दूतावास की कार पर किए गए हमले की तरह इस बार भी धमाके के पीछे तेहरान का ही तो हाथ नहीं है। खासतौर पर इस बार भी 2012 की ही तरह ईरान के इस्राइल से अपने वैज्ञानिक की हत्या का बदला लेने की धमकी देने के कारण इस संभावना को बल मिल रहा है।
दरअसल साल 2012 में 13 फरवरी को इस्राइली राजनयिक की इनोवा कार में एक ट्रैफिक सिग्नल पर एक मोटरसाइकिल सवार ने स्टिक बम (चुंबक से कहीं भी चिपका दिया जाने वाला बम) चिपका दिया था, जो कार के थोड़ा आगे प्रधानमंत्री आवास के पास पहुंचते ही फट गया था।
इस हमले में इस्राइली राजनयिक की पत्नी येहोशुआ कोरेन घायल हो गई थीं। इस हमले की जांच के दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को इस हमले के पीछे ईरानी खुफिया एजेंसियों का हाथ होने की तरफ इशारा करने वाले सबूत मिले थे।
यह हमला पूरे विश्व में इस्राइली दूतावासों आदि पर श्रृंखलाबद्ध हमलों का ही एक हिस्सा था। नई दिल्ली में राजनयिक की कार में धमाके वाले दिन ही पूर्व सोवियत संघ के देश जार्जिया में इस्राइली राजनयिक की कार से बम बरामद हुआ था। अगले दिन थाईलैंड में तीन ईरानी नागरिकों ने गलती से अपने ही घर को विस्फोटक से उड़ा लिया था। उस घटना में पुलिस ने एक ईरानी नागरिक को गिरफ्तार किया था।
उस समय ईरान के कई परमाणु वैज्ञानिकों की एक के बाद एक हत्या हो गई थी, जिसका आरोप ईरान ने इस्राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद पर लगाया था। तब माना गया था कि इसी हमले का बदला लेने के लिए ईरान ने इस्राइली राजनयिकों पर हमले कराए हैं।
इस बार भी तीन महीने पहले नवंबर में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले वैज्ञानिक मोहसिक फखरीजादेह की हत्या हो गई थी। तेहरान ने इस हत्या का आरोप इस्राइल पर लगाते हुए बदला लेने की धमकी दी थी। इसके बाद दिसंबर में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने भी इस्राइली नागरिकों और उनसे जुड़ी जगहों पर हमला होने की संभावना का अलर्ट जारी किया था।