प्रचलन से बाहर हुए 500 और एक हजार के नोटों को कालेधन के कारोबारी किसानों के बीच खपा रहे हैं। आखिरी दस दिनों में इन नोटों को खपाने के इस दौर में आढ़ती और राइस मिलर 10 फीसदी की दलाली ले रहे हैं।
यह स्थिति बरेली और आसपास के जिलों की प्रमुख मंडियों और ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रही है। कुछ ने तो किसानों को एडवांस में ये नोट दे दिए हैं। गेहूं अप्रैल और मई के महीने में लेने का भी वादा कर लिया है। यानी किसानों के ऊपर चार महीने एडवांस में नोटों की बौछार हो रही है।
बरेली मंडल में हर साल औसतन नवंबर से फरवरी तक करीब एक लाख क्विंटल तक गेहूं खरीद होती रही है, लेकिन नोटबंदी से गेहूं की खरीद दोगुनी से अधिक हो गई है। इसलिए हर दिन कागजों पर ढाई लाख क्विंटल से अधिक गेहूं खरीद दिखाई जा रही है। मंडी परिषद की मिलीभगत से आढ़तों पर सिक्स आर भी काटी जा रही है। धान खरीद का खेल राइस मिलों में सबसे ज्यादा खामोशी से चल रहा है।
शाहजहांपुर और पीलीभीत में हर दिन 10 से 12 करोड़ रुपये की खरीद कागजों में पुराने नोटों से हो रही है। बदायूं में जहां धान की उपज बहुत कम होती है, वहां खरीद अधिक दिखाई दे रही है। बरेली स्थित आंवला, देवचरा, रिच्छा, बहेड़ी, फरीदपुर, धोरा टांडा, भुता आदि इलाकों में कई राइस मिलर इसी काम में लगे हुए हैं।
गेहूं न खेत में न किसानों के पास, फिर भी दिखा रहे खरीद
ऐसे हो रहा है धंधा
10 से 12 प्रतिशत पर नोट बदले जाने का धंधा कारोबारी, आढ़ती, किसान और दलालों के इर्द-गिर्द ही चल रहा है। इस धंधे में वाणिज्यकर और मंडी परिषद के कुछ अफसरों का नेटवर्क भी शामिल है। क्योंकि वही मंडी समिति की सिक्स आर उपलब्ध कराने के साथ-साथ मौन सहमति भी देते हैं।
गेहूं न खेत में न किसानों के पास, फिर भी दिखा रहे खरीद
इस समय सीजन धान का चल रहा है। सरकारी क्रय केंद्र खाली पड़े हैं, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। जबकि नोट बदली में लगे धंधेबाज किसानों से अधिकतम 1200 से 1300 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद रहे हैं। वे इस खरीद में अपनी प्रतिबंधित करेंसी भी खपा रहे हैं।
गेहूं खरीद में तो प्रतिबंधित नोट खपाने की हद पार हो गई है। क्योंकि इस समय गेहूं न तो खेत में है और न किसानों के पास। खेतों में बुआई होने के बाद गेहूं की फसल अभी अंकुरण की स्थिति में है।
कभी भी की जा सकती है खरीद
अनाज, दलहन, तिलहन आदि की किसानों से खरीद कभी भी की जा सकती है। आढ़ती खरीद पर निर्धारित मंडी शुल्क देता है। इसी के आधार पर हम खरीद भी मानते हैं।- एसपी यादव, उप निदेशक मंडी परिषद