1 जनवरी के बाद साइकिल को लेकर छिड़ी जंग में अखिलेश के कमबैक से भाजपा हाईकमान चिंतित है। हाईकमान मान रहा है कि पिछले एक महीने में अखिलेश ने अपनी छवि को इतना चमका लिया है जो वे पिछले पांच साल में चमका नहीं पाये है। साथ ही भाजपा हाईकामन को यह भी लग रहा है कि एक जनवरी के बाद साइकिल को लेकर छिड़ी जंग के बाद चुनावी मैदान से मीडिया तक अखिलेश ही चर्चाओं में रहे, जबकि भाजपा पिछले महीने में मैदान से बिल्कुल गायब रही। लिहाजा, हाईकमान इसकी भरपाई का काम बिना समय गंवाए शुररु करेगा।
पार्टी अब चुनाव घोषणा प़त्र जारी करने के बाद चुनाव प्रचार अभियान को तेज करने में जुट गई है। सभी केंद्रीय मंत्रियों की प्रेस कांफ्रेंस, जनसभाये और दौरें बढ़ाने के लिए कहा गया है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी अपनी जनसभाये बढ़ाने की मांग की गई है।
खासकर उत्तर प्रदेश से आने वाले केंद्रीय मंत्रियों राजनाथ सिंह, उमा भारती और कलराज मिश्र से चुनावी दौरे ज्यादा से ज्यादा करने की गुजारिश की गई है। आम बजट के बाद केंद्रीय मंत्रियों के दौरे ज्यादा से ज्यादा करने के लिए कहा गया है।
पार्टी के एक शीर्ष रणनीतिकार ने अमर उजाला को बताया कि चुनाव घोषणा पत्र में किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा अखिलेश के उदय को रोकने के लिए उछाला गया है।