जयललिता के निधन के बाद अन्नाद्रमुक के पलामीसामी और पन्नीरसेल्वम धड़े का आखिरकार छह महीने तक चली जोर आजमाइश के बाद विलय हो गया है। इसके साथ ही भाजपा को दक्षिण के सबसे महत्वपूर्ण सूबे में दमदार प्रवेश का बड़ा सियासी मौका हाथ लगा है। जदयू की तरह अन्नाद्रमुक भी जल्द ही राजग में शामिल होने की घोषणा करेगी।
मोदी मंत्रिमंडल के इसी हफ्ते संभावित विस्तार में अन्नाद्रमुक के कोटे से तीन तो जदयू कोटे से दो सांसदों को जगह देने की प्रक्रिया पर बातचीत अंतिम दौर में है। दोनों धड़ों के विलय के बाद अन्नाद्रमुक के राजग में शामिल होने से भाजपा के मिशन 2019 को बड़ी ताकत हासिल होगी।
गौरतलब है कि अन्नाद्रमुक के दोनों धड़ों को साधने की कमान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संभाल रहे थे। बीते हफ्ते ही दोनों ही धड़ों के मुखिया ने इस क्रम में पीएम से अलग-अलग मुलाकात की थी।
गौरतलब है कि जयललिता के निधन के बाद से ही भाजपा की निगाहें अन्नाद्रमुक पर टिकी थी। पहले भाजपा पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाए रखने के पक्ष में थी। मगर बाद में शशिकला केहस्तक्षेप के बाद जब सरकार की कमान ओ पलानीसामी के हाथ में गई तो अन्नाद्रमुक दो धड़ों में बंट गई।
विलय और राजग में शामिल होने संबंधी बातचीत के दौरान ही भाजपा नेतृत्व साफ कर दिया था अन्नाद्रमुक को शशिकला और टीटीवी दिनाकरण से पीछा छुड़ाना होगा। भाजपा सूत्रों के मुताबिक इन दोनों ही लोगों को अन्नाद्रमुक से बाहर करने पर भी सहमति बन गई है।
अन्नाद्रमुक को साधना बड़ी कामयाबी
अन्नाद्रमुक को साधना भाजपा के लिए बड़ी सियासी कामयाबी है। इससे न सिर्फ पार्टी को मिशन 2019 में अपना लक्ष्य हासिल करने की राह आसान होगी, बल्कि उसे तमिलनाडु में अपना पैर पसारने का ऐतिहासिक अवसर हासिल होगा।
दरअसल जयललिता के निधन और डीएमके मुखिया करुणानिधि के राजनीति से किनारे होने के बाद सूबे में नेतृत्वहीनता की स्थिति है। वहां पहली बार भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। ऐसे में यह स्थिति भाजपा के भविष्य के लिए बेहतर है।
केंद्रीय राजनीति में और बढ़ेगा दबदबा
जदयू के बाद अन्नाद्रमुक के राजग में शामिल होने से केंद्रीय राजनीति में भाजपा का दबदबा और बढ़ जाएगा। लोकसभा में पहले से राजग के 339 सदस्य हैं। अब अन्नाद्रमुक के 37 और जदयू के 2 सदस्यों के साथ आने से यह संख्या 378 हो जाएगी।
इसी प्रकार राज्यसभा में राजग के सदस्यों की संख्या अन्नाद्रमुक के 13 और जदयू के 9 सदस्यों के साथ 107 हो जाएगी। भाजपा सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार में जदयू को एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री का पद तो अन्नाद्रमुक को दो केंद्र्रीय तो एक राज्यमंत्री का पद दिया जाएगा।
अन्नाद्रमुक की ओर से राज्यसभा सदस्य मैत्रयेन, लोकसभा उपाध्यक्ष एम थंबीदुरई और लोकसभा में संसदीय दल के नेता वेणुगोपाल को जगह दिए जाने का प्रस्ताव है। इनमें एक अगड़ी, एक पिछड़ी और एक अनुसूचित जाति से हैं।
मगर दिनाकरण अब भी हैं सिरदर्दी
अन्नाद्रमुक के दोनों धड़ों का विलय करा कर भाजपा ने तमिलनाडु में बड़ी सफलता को हासिल कर ली है, मगर टीटीवी दिनाकरण अब भी पार्टी के लिए चुनौती हैं।
गौरतलब है कि 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में अन्नाद्रमुक के 134 विधायक हैं। मगर इनमें से करीब दो दर्जन विधायक अब भी दिनाकरण के साथ हैं। अन्नाद्रमुक और भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि मुख्य विपक्षी दल डीएमके नेतृत्वहीनता की स्थिति के कारण फिलहाल मध्यावधि चुनाव के मूड में नहीं है।