पश्चिम बंगाल के चुनाव नतीजे के बाद से कई राज्यों में एकाएक उभरे असंतोष को थामने के लिए भाजपा नेतृत्व सत्ता संतुलन की रणनीति पर काम कर रहा है। इस क्रम में त्रिपुरा में प्रदेश अध्यक्ष पद की कमान असंतुष्ट खेमे को दिया जाएगा। वहीं, कर्नाटक में भी बड़े बदलाव के आसार हैं।
दरअसल त्रिपुरा में कई विधायक कुछ महीनों से मुख्यमंत्री बिल्पब देव से बेहद नाराज हैं। बंगाल चुनाव के बाद मुकुल राय के वापस टीएमसी में जाने के बाद भाजपा नेतृत्व चिंतित है। क्योंकि घर वापसी के बाद ममता बनर्जी ने उन्हें मिशन त्रिपुरा पर लगा दिया है। त्रिपुरा में विरोधी गुट सुदीप रॉय बर्मन की अगुवाई में करीब डेढ़ दर्जन असंतुष्ट विधायक एकजुट हैं। इसके बाद भाजपा ने दोनों खेमों में संतुलन साधने के लिए कई मैराथन बैठकें कीं।
सूत्रों के अनुसार इस समय मुख्यमंत्री के पास 28 विभाग हैं। ऐसे में नेतृत्व उनसे कुछ विभाग लेकर दूसरों को सौंपना चाहता है। वहीं विरोधी खेमे के रामप्रसाद पाल को नया अध्यक्ष बनाने की भी चर्चा है। राज्य में एक साल से खाली संगठन मंत्री के पद पर संघ के वरिष्ठ प्रचारक मनोरंजन प्रधान को बैठाने पर विचार चल रहा है।
कर्नाटक में भी नेतृत्व परिवर्तन पर विचार
कर्नाटक में असंतोष खत्म करने के लिए भी पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है। कई विकल्पों पर चर्चा चल रही है। एक विकल्प मौजूदा सीएम बीएस येदियुरप्पा को राज्यपाल और उनके पुत्र बीवाई विजयेंद्र को केंद्र में राज्य मंत्री बनाने का है। राज्य के ताकतवर लिंगायत समुदाय में गहरी पकड़ रखने के कारण नेतृत्व येदियुरप्पा को नाराज नहीं करना चाहता। उनकी सहमति से ही विवाद खत्म करने का फार्मूला ढूंढा जा रहा है।
असंतोष वाले अन्य राज्यों पर भी मंथन
पार्टी सूत्रों के मुताबिक नेतृत्व असंतोष वाले राज्यों में चरणबद्ध तरीके से जरूरी परिवर्तन करने का है। इन राज्यों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़ शामिल हैं। कुछ राज्यों में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले तो कुछ में चुनाव बाद जरूरी परिवर्तन किए जाएंगे।