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त्रिपुरा की जंग जीतने के लिए पीएम मोदी की दो सभाएं आयोजित करेगी भाजपा

Thu, 18 Jan 2018 10:53 PM IST
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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त्रिपुरा की सियासी जंग जीतने के लिए भाजपा सूबे के चुनाव में पीएम मोदी की दो चुनावी सभाएं आयोजित करेगी। पार्टी ने त्रिपुरा और मेघालय में अपना चुनाव अभियान गणतंत्र दिवस से पहले शुरू करने का निर्णय लिया है। नागालैंड में वह अपने चुनावी अभियान की शुरूआत में थोड़ा विलंब कर सकती है। पार्टी सूत्रों की मानें तो केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह त्रिपुरा में भाजपा के चुनाव अभियान का श्रीगणेश करेंगे। 

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उम्मीद जताई जा रही है कि 23 जनवरी को पार्टी यहां अपने अभियान की शुरूआत करेगी। राज्य प्रभारी हेमंत विश्वशर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री से सूबे के प्रचार अभियान को शुरू करने के लिए 23 जनवरी का समय मांगा है। राजनाथ की उपलब्धता इस दिन संभव हुई तो पार्टी 23 को ही अपने अभियान की शुरूआत करेगी। वैसे पार्टी की रणनीति गणतंत्र दिवस यानि 26 जनवरी से पहले ही त्रिपुरा में आपने चुनाव अभियान की शुरूआत करने की है। उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग ने सूबे के विधानसभा चुनाव के तिथियों का ऐलान कर दिया है। त्रिपुरा विधानसभा के लिए मतदान 18 फरवरी को होगा। तो मतों की गिनती 3 मार्च को होगी। 

राजनाथ क्यों करेंगे चुनाव का श्रीगणेश 
राजनाथ सिंह के जरिए त्रिपुरा चुनाव का श्रीगणेश कराने के निर्णय पर सूबे की चुनाव रणनीति से जुड़े एक नेता का कहना है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह हाल ही में त्रिपुरा चुनाव का दौरा कर लौटे हैं। तो पीएम मोदी की सभाएं पार्टी ने चुनावी माहौल बनने पर कराने का निर्णय लिया है। इसलिए पार्टी अपने अभियान की शुरूआत गृह मंत्री से कराएगी। उक्त नेता का कहना था कि राजनाथ भी पार्टी के बड़े नेता हैं। हालांकि पूर्वोत्तर के राज्यों में गृह मंत्रालय के प्रभाव का विशेष असर रहता है। राजनाथ के जरिए त्रिपुरा चुनाव अभियान के शुरूआत कराने के पीछे इसे भी एक वजह माना जा रहा है। 
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माणिक सरकार के खिलाफ माहौल और मोदी की छवि रहेगी भाजपा का चुनावी औजार 

भाजपा - फोटो : amar ujala
त्रिपुरा की चुनावी जंग में भाजपा माणिक सरकार के खिलाफ सूबे में बने माहौल और पीएम मोदी की लोकप्रियता को सियासी औजार बनाएगी। पार्टी को उम्मीद है कि त्रिपुरा में इस दफे भाजपा की अपने दम पर सरकार बनेगी। पार्टी के अंदरूनी सर्वे में उसे बहुमत से ज्यादा सीटें मिलती दिख रही हैं। त्रिपुरा ऐसा राज्य है जहां भाजपा का सीधा मुकाबला वाम दल के साथ है। वर्ष 1993 से सूबे का मुख्यमंत्री रहते हुए माणिक सरकार के प्रति जनता में रोष है। उस रोष को भाजपा अपने पक्ष में भुनाना चाहती है। इसके साथ ही भाजपा ने सूबे की जनता में पीएम मोदी के नेतृत्व और विकास के एजेंडे को प्रचारित करने का निर्णय लिया है। सर्वे में यह बात उभरकर सामने आई है कि राज्य की जनता भी विकास को लेकर उत्सुक है। 

त्रिपुरा की जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाएगी भाजपा 
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि गुजरात चुनाव के बाद कार्यकर्ताओं के मन में जो निराशा पैदा हुई है। त्रिपुरा की जीत कार्यकर्ताओं के मन से निराशा हटाकर उसका मनोबल बढ़ाएगी। क्योंकि त्रिपुरा में भाजपा का सीधा मुकाबला अपने धूर वैचारिक विरोधी वाम दल से है। वाम दल को सीधे पटकनी देने से इसका राष्ट्रीय स्तर पर संदेश जाएगा। 

पीछे के बिहार और दिल्ली के हार का उल्लेख करते हुए उक्त नेता ने कहा कि इन दो राज्यों में भाजपा की हार के बाद कार्यकर्ताओं के मन में निराशा पैदा हुई थी। लेकिन असम की जीत ने उनमें दोबारा से जोश भरा। उसके बाद पार्टी का विजयी अभियान दोबारा शुरू हो सका। ठीक उसी तरह गुजरात में भाजपा की बेशक जीत हुई है। मगर 115 से घटकर 99 सीटें आने से कार्यकर्ताओं में मन में निराशा है। उन्हें इस बात का अहसास हो रहा है कि गुजरात का मुकाबला नजदीकी था। वहां हार भी मिल सकती थी। लेकिन त्रिपुरा की जीत से कार्यकर्ताओं के मन में जोश पैदा होगा। 
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त्रिपुरा के लिए क्या है भाजपा की रणनीति 

भाजपा - फोटो : amar ujala
पूर्वोत्तर में अरूणाचल और नागालैंड में अपनी सरकार बनाकर भाजपा ने यह सिद्ध कर दिया है कि चुनाव जीते बिना सरकार बनाने के खेल में उसे महारत हासिल हो गई है। पहले कांग्रेस पार्टी इस खेल की खिलाड़ी मानी जाती थी। मगर इस मामले में भाजपा उससे आगे निकल गई है। मगर पार्टी ने त्रिपुरा के चुनाव में सीधी जीत की रणनीति बनाई है। इसलिए बीते 6 माह से पार्टी अपने प्लान को जमीन पर उतारने में लगी हुई थी। चुनाव के ऐलान से पहले ही भाजपा ने त्रिपुरा की जनता के बीच यह विश्ववास पैदा कर दिया है कि माणिक सरकार का विकल्प वही है।

 विकल्प बनने के कवायद में भाजपा ने तृणमूल के जहां सभी विधायकों को भाजपा में शामिल कर लिया। तो कांग्रेस के भी बड़े नेता और विधायक भाजपा के फोल्ड में आ गए। इसके अलावा पार्टी ने सूबे की राजनीति गणित में अहम भूमिका निभाने वाली आदिवासी इलाकों में भी अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। आदिवासियों के बीच के दो प्रमुख दलों आईपीएफटी और आईएनपीटी पर डोरे डाल दिए हैं। आईपीएफटी के साथ उसका गठबंधन लगभग तय माना जा रहा है। तो आईएनपीटी भाजपा और वाम दोनों के ही संपर्क में है। 

मतलब वोट के गणित के मामले में भी भाजपा ने कांग्रेस और तृणमूल के लोगों को अपने पाले में कर जमीन मजबूत कर ली है। तो आदिवासी इलाकों में भी वह आदिवासी दलों के साथ हाथ मिलाकर वाम के खिलाफ पूरी मोर्चेबंदी की तैयारी में है। पार्टी के एक नेता की माने तो उनकी रणनीति का असर होने लगा है। खुद वाम दलों की ओर से त्रिपुरा चुनाव को महाभारत का युद्ध करार दिया जाने लगा है। इसका संकेत है कि वाम दल अपनी सियासी जमीन खो रहे हैं। वैसे भी पार्टी ने पूर्वोत्तर की राजनीति और जोड़तोड़ के माहिर खिलाड़ी हेमंत विश्व शर्मा को सूबे की कमान सौंप रखी है। राष्ट्रीय महासचिव राम माधव के निर्देशों पर शर्मा चुनावी रणनीति को जमीन पर उतार रहे हैं। 
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