दरअसल, पश्चिम बंगाल के भाजपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव परिणाम आने के पहले ही इस बात की आशंका जाहिर कर दी थी कि अगर चुनाव परिणाम तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में नहीं आते हैं तो राज्य में हिंसा का जबरदस्त दौर शुरू हो सकता है। भाजपा कार्यकर्ताओं की इस आशंका को ममता बनर्जी ने चुनाव बाद उन्हें 'देख लेने' की बात कहकर और हवा दे दी थी। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद बंगाल में हिंसा शुरू होते देख प्रदेश भाजपा इकाई ने केंद्रीय इकाई के सामने प्रदेश सरकार को भंग कराने की मांग कर दी थी।
यह मांग करने वालों में प्रदेश के लगभग सभी शीर्ष नेता शामिल थे। जानकारी के मुताबिक, इसके बाद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय से इस मसले पर उनकी राय मांगी थी क्योंकि बंगाल में भाजपा का मिशन आगे बढ़ाने में सबसे प्रमुख भूमिका उन्होंने ही निभाया था। कैलाश विजयवर्गीय ने इस मुद्दे पर केंद्र को भेजी अपनी राय में ममता बनर्जी सरकार को 'भंग न करने' का सुझाव दिया था।
उनका मत था कि चुनाव के बाद से जिस तरह तृणमूल कांग्रेस पार्टी के पार्षदों, विधायकों और सांसदों का भाजपा में आना जारी है, उससे टीएमसी स्वयं ही कमजोर हो रही है और आने वाले समय में विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत सुनिश्चित है। ऐसे समय में पार्टी को कोई गलती नहीं करनी चाहिए जो ममता बनर्जी को सहानुभूति का लाभ उठाने का मार्ग दे। बताया जाता है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उनका यह सुझाव स्वीकार कर लिया है। उनकी सुझाव का ही असर है कि गृह मंत्रालय बंगाल को निर्देश देकर हालात सुधारने की सलाह दे रहा है।