हरियाणा में सत्ता विरोधी लहर थामने केलिए भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व कम से कम एक तिहाई विधायकों की बलि लेगा। गैरजाट बिरादरी को अपने पक्ष में रखने के लिए नेतृत्व टिकट वितरण में पिछली बार की तरह इस बार जाट बिरादरी को थोक के भाव टिकट नहीं देगी।
लोकसभा चुनाव में पार्टी 90 में से जिन 11 विधानसभा सीटों पर बढ़त हासिल करने में नाकाम रही, उनमें ज्यादातर जाट और मुस्लिम बाहुल्य सीटें थीं। इनमें दो कद्दावर जाट मंत्रियों कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनखड़ की नारनौद और बादली सीट भी शामिल थी। सूत्रों का कहना है कि नतीजे आने के बाद कई विधायक और मंत्री सीट बदलने की कोशिशों में जुटे हैं। हालांकि नेतृत्व ने किसी भी सूरत में इनकी सीटों में बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।
बीते चुनाव में पार्टी ने करीब 28 फीसदी टिकट जाट बिरादरी को दिया था। इनमें से 6 सीटों पर ही पार्टी को जीत हासिल हुई। फिर पार्टी का इरादा वहां गैरजाट वोटों को अपने पक्ष में गोलबंद करने की है। ऐसे में पार्टी इस बिरादरी केकरीब एक दर्जन नेताओं को ही टिकट देगी। पार्टी की निगाहें अंतर्कलह में डूबी कांग्रेस और इनेलो के नेताओं पर है। बीते चुनाव में पार्टी ने 17 सीटों पर दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट दिया था।