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गुजरात चुनाव: अभी और पाटीदारों को चुनाव में उतारेगी भाजपा

Fri, 17 Nov 2017 07:57 PM IST
शशिधर पाठक/नई दिल्ली
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Amit Shah - फोटो : ANI
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भाजपा ने गुजरात चुनाव की पहली सूची में 15 पाटीदारों को चुनाव मैदान में उतारा है, लेकिन इतना ही काफी नहीं है। पहले चरण में 89 सीटों पर मतदान होना है। पार्टी ने इनमें से 58 सीटों के उम्मीदवार घोषित किए हैं। 21 उम्मीदवारों की घोषणा होनी बाकी है।
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इसके अलावा दूसरे चरण की  93 सीटों के लिए 81 उम्मीदवारों की घोषणा की जानी है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि ऐसे में इस बार गुजरात चुनाव के बाबत आगे भी भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग जारी रहेगी।

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जीतू भाई वाघाणी के करीबी के अनुसार पहली सूची का अभी तक अच्छा रिसपांस आ रहा है। केंद्रीय नेतृत्व ने एक-एक सीट पर उम्मीदवारों की क्षमता का आकलन करके टिकट दिया है। वहीं अशोक रोड स्थित भाजपा मुख्यालय सूत्रों के अनुसार पहले चरण के लिए 21 नवंबर तक तथा दूसरे चरण के लिए 27 नवंबर तक नामांकन किया जा सकता है।
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पहले चरण के लिए जिन सीटों की घोषणा नहीं हुई है, उनमें से कई सीटें पाटीदार समाज की बहुलता वाली हैं। यह पाटीदार क्षेत्र की अहम सीटें हैं। वैसे भी पार्टी ने पाटीदार के प्रभाववाली सीटों पर अभी इंतजार करने की रणनीति को वरीयता दी है, इसलिए पहले चरण के घोषित होने वाले नामों में अभी और पाटीदार समाज के लोगों को टिकट मिल सकता है।  

पार्टी ने अभी पाटीदार अनामत आंदोलन समिति से जुड़े वरुण पटेल और रेशमा पटेल को उम्मीदवार बनाने की घोषणा नहीं की है। वरुण और रेशमा दोनों हार्दिक पटेल के साथ सक्रिय थे और उन्हें छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। माना जा रहा है कि भाजपा इन्हें प्रमुखता से लेकर चल रही है और अगली सूची में स्थान दे सकती है।

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सूत्र बताते हैं टिकट बंटवारे में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला फैक्टर का भी पूरा ध्यान रखा गया है। हार्दिक पटेल, जिग्नेश मेवानी, अल्पेश ठाकोर से होने वाले नुकसान की भरपाई पर भी पार्टी काफी ध्यान दे रही है।

मोदी शैली में खाम की काट
भाजपा पूरे गुजरात में प्रचार कर रही है कि कांग्रेस पार्टी खाम (केएचएएम-क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुसलमान) समीकरण को बढ़ावा देकर जातिगत राजनीति को हवा दे रही है। लेकिन पहली सूची में भाजपा ने इस खाम की पूरी काट तैयार करने का संदेश दे दिया है।

गुजरात की राजनीति को समझने वाले सूत्र के अनुसार यह मोदी शैली में खाम की काट जैसा ही है। माना जा रहा है कि पार्टी ने परंपरागत समीकरण के आधार पर प्रत्याशी तय करने में थोड़ा सा बदलाव किया है। इसे राज्य में बदल रहे हालात को ध्यान में रखकर किया गया है।
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