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राजनीति: पांचों चुनावी राज्यों में मुसलमानों को टिकट देगी भाजपा, हर सीट पर 5000 मुस्लिम वोटरों को पार्टी से जोड़ने का लक्ष्य

सार

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नौ उम्मीदवारों को अवसर दिया था, जिनमें तीन उम्मीदवार मुस्लिम बहुल मतदाताओं वाली सीटों पर दूसरे नंबर पर रहे थे। इसके अलावा पार्टी ने असम में 8, तमिलनाडु में 2 और केरल विधानसभा चुनाव में 12 (10 ईसाई और दो मुस्लिम) अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मौका दिया था...
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प्रधानमंत्री मोदी के साथ मुस्लिम समुदाय के लोग - फोटो : Getty
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विस्तार
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भाजपा ने पूरे देश के मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी पैठ बढ़ाने का निर्णय किया है। भाजपा के दिवंगत नेता सिकंदर बख्त की जयंती 24 अगस्त पर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करेगा और इस दिन से अल्पसंख्यक समुदाय को भाजपा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाएगा। उत्तर प्रदेश सहित सभी पांच चुनावी राज्यों में हर विधानसभा सीट पर पांच हजार मुस्लिम मतदाताओं को भाजपा के पक्ष में वोट कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पार्टी इस बार उत्तर प्रदेश में भी मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देकर उनके बीच एक विशेष संदेश देने की कोशिश करेगी।

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भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने अमर उजाला को बताया कि उत्तर प्रदेश की उन विधानसभा सीटों पर जहां मुस्लिम मतदाता 70-80 फीसदी या इससे भी ज्यादा रहते हैं, वहां मजबूत मुस्लिम उम्मीदवारों को अवसर दिया जाएगा और उनकी जीत सुनिश्चित की जाएगी। ऐसे उम्मीदवारों की शीघ्र पहचान कर उन्हें चुनावी तैयारी में जुट जाने के लिए कहा जाएगा।

लेकिन जिन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम है, वे किसी एक पक्ष में वोट देकर चुनाव परिणाम प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं, वहां मुस्लिम समुदाय के कम से कम 5000 वोट भाजपा उम्मीदवारों के पक्ष में डलवाने का प्रयास किया जाएगा। इससे मुस्लिम समाज के लोगों को भाजपा के करीब लाने में मदद मिलेगी।
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वर्ष 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को अवसर नहीं दिया था। उसके इस फैसले की काफी आलोचना भी हुई थी। भाजपा नेताओं का कहना है कि 2017 के चुनाव में भाजपा के पास जिताऊ मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार नहीं थे, जिसके कारण उन्हें अवसर नहीं मिल पाया।

लेकिन पार्टी का दावा है कि इस बार उसके पास कई मजबूत मुस्लिम उम्मीदवार हैं, जिन पर दांव खेला जा सकता है। लिहाजा इस चुनाव में भाजपा की चुनावी लिस्ट में कई मुस्लिम उम्मीदवारों का नाम दिखाई पड़ सकते हैं।

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यहां दिया मुस्लिम उम्मीदवारों को मौका

इसके पहले हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नौ उम्मीदवारों को अवसर दिया था, जिनमें तीन उम्मीदवार मुस्लिम बहुल मतदाताओं वाली सीटों पर दूसरे नंबर पर रहे थे। इसके अलावा पार्टी ने असम में 8, तमिलनाडु में 2 और केरल विधानसभा चुनाव में 12 (10 ईसाई और दो मुस्लिम) अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मौका दिया था। भाजपा नेताओं का दावा है कि वह जिताऊ होने के आधार पर सभी पांच चुनावी राज्यों में मुस्लिम उम्मीदवारों को मौका दे सकती है।

जमाल सिद्दीकी ने बताया कि देश प्रेम और राष्ट्रवाद हमेशा से भाजपा की राजनीतिक विचारधारा के मूल विषय रहे हैं। इस विचारधारा को देश की जनता तक पहुंचाने में जितनी भूमिका अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं की रही, उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका सिकंदर बख्त जैसे मुस्लिम नेताओं की थी। लेकिन कांग्रेस ने मुस्लिमों को हिंदुत्व के मुद्दे पर भड़काकर भाजपा से दूर रखने का प्रयास किया, जिसमें वे काफी हद तक सफल भी रहे। लेकिन अब समय आ गया है कि इस भ्रम को तोड़ना चाहिए और इसी उद्देश्य के लिए वे काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र निर्माण में 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' के साथ 'सबका प्रयास' शामिल करने की बात कर रहे हैं, मुस्लिम समाज को भी इस राष्ट्रीय विचारधारा में और मजबूती के साथ जुड़ना चाहिये। इससे समाज में भाजपा के प्रति फैलाई गई गलतफहमियों को दूर करने का अवसर मिलेगा। अल्पसंख्यक मोर्चा की टीम इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाएगी।
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