भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव सरकार की खराब कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाया था। उसका यह फॉर्मूला बेहद कारगर रहा था। बिहार में नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल के बाद भी एनडीए लालू राज के दौरान हुई कानून-व्यवस्था की घटनाओं को प्रमुखता से मुद्दा बनाता है और परिणाम देखकर कहा जा सकता है कि उसे इसमें सफलता भी मिल रही है।
ममता बनर्जी के खिलाफ भाजपा पश्चिम बंगाल की कथित खराब कानून-व्यवस्था और मुस्लिम तुष्टिकरण को हथियार बनाएगी। भाजपा रैलियों-प्रदर्शनों के जरिए मुर्शिदाबाद में हिंदुओं पर हुए हमलों, आरजी कर अस्पताल में महिला डॉक्टर की दुष्कर्म-हत्या और बांग्लादेश से हो रहे अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी और इसके सहारे ममता सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह की जनसभाओं से इसकी शुरुआत भी हो चुकी है।
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भाजपा ने उत्तर प्रदेश में 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में अखिलेश यादव सरकार की खराब कानून-व्यवस्था को मुद्दा बनाया था। उसका यह फॉर्मूला बेहद कारगर रहा था। बिहार में नीतीश कुमार के लंबे शासनकाल के बाद भी एनडीए लालू राज के दौरान हुई कानून-व्यवस्था की घटनाओं को प्रमुखता से मुद्दा बनाता है और परिणाम देखकर कहा जा सकता है कि उसे इसमें सफलता भी मिल रही है। पश्चिम बंगाल में भी यही यूपी-बिहार का फॉर्मूला अपनाया जाएगा। पार्टी को उम्मीद है कि इस फॉर्मूले से वह पश्चिम बंगाल में जीत हासिल करने में कामयाब रहेगी।
पीएम-एचएम ने बनाया मुद्दा
इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल में अलीपुरद्वार में रैली करते हुए राज्य की कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में गुंडों को खुली छूट मिली हुई है। पहले वामपंथी शासन में और अब ममता बनर्जी के शासन काल में कट मनी का खेल खेला जाता है। इसके बाद अमित शाह ने एक जून को अपने पश्चिम बंगाल दौरे में कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल का चुनाव केवल राज्य स्तरीय चुनाव नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ चुनाव है। उन्होंने ममता सरकार में नौकरियों को बेचे जाने का आरोप भी लगाया।
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राज्य में हिंदू असुरक्षित- भास्कर घोष
पश्चिम बंगाल भाजपा नेता भास्कर घोष ने अमर उजाला से बातचीत में पश्चिम बंगाल सरकार पर एक वर्ग विशेष की समर्थक और दूसरे का विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ऐसा पहली बार हुआ है कि यहां हिंदू समुदाय के लोगों को अपना घर छोड़कर सरकारी कैंपों में रहना पड़ा है। लोगों को उनके घरों से निकालकर जलाया-मारा गया है। उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल की जनता इस कुशासन को अब और सहने के लिए तैयार नहीं है और वह इससे मुक्ति चाहती है।
भास्कर घोष ने कहा कि एक समय में पूरे देश से लोग रोजगार-शिक्षा के लिए पश्चिम बंगाल आते थे, लेकिन वामपंथी-तृणमूल कांग्रेस सरकार की अराजक नीतियों ने इसकी दुर्दशा कर दी और आज बंगाल के लोगों को दूसरे शहरों में 15-20 हजार रुपये की नौकरी के लिए जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बंगाल को अपना पुराना गौरव वापस चाहिए और इसके लिए जनता बदलाव का मन बना चुकी है।