फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MCD Election: इन कलाकारों के लिए कला का मंच बन जाता है चुनाव, सड़कों पर बहा रहे हैं पसीना

सार

MCD Election: परिधि आर्ट ग्रुप के अध्यक्ष निर्मल रतनलाल वैद ने अमर उजाला को बताया कि वे 1985 से नुक्कड़ नाटकों और अन्य मंचों के जरिए लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे कलाकार भी शामिल हैं, जो विभिन्न टीवी सीरियल में छोटे-मोटे रोल भी कर चुके हैं...
विज्ञापन
दिल्ली भाजपा के प्रदेश कार्यालय में नुक्कड़ नाटकों के जरिये प्रचार का प्रदर्शन करते कलाकार - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली नगर निगम चुनाव में सभी राजनीतिक दल अपने चुनाव प्रचार के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें सांस्कृतिक कलाओं के जरिये होने वाला प्रचार भी शामिल है, जिसमें नुक्कड़ नाटकों के जरिये राजनीतिक दल विपक्षियों पर हमले कर रहे हैं और अपनी उपलब्धियों का प्रचार कर रहे हैं। चुनाव प्रचार का यह तरीका लोगों को खूब पसंद आता है, साथ ही यह चुनावी मंच युवा कलाकारों के लिए अपनी कला को जनता के सामने दिखाने और कुछ पैसे कमाने का साधन भी बन जाती है।

भारतीय जनता पार्टी दिल्ली नगर निगम चुनाव में एक हजार नुक्कड़ नाटकों के जरिये जनता को अपने साथ जोड़ने का काम करेगी। इसके लिए पार्टी प्रदेश कार्यालय में इन कलाकारों की कला को परखने का काम भी किया जा रहा है। पार्टी इन कलाकारों को अपनी तरफ से विषय दे रही है, जिस पर कंटेंट बनाकर इन्हें प्रदर्शन करना है। नुक्कड़ नाटकों की एक टीम में छह से लेकर आठ तक कलाकार शामिल हैं।

कलाकारों को अनुभव-कमाई कराना उद्देश्य

परिधि आर्ट ग्रुप के अध्यक्ष निर्मल रतनलाल वैद ने अमर उजाला को बताया कि वे 1985 से नुक्कड़ नाटकों और अन्य मंचों के जरिए लोगों को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। दिल्ली भाजपा के लिए उन्होंने विभिन्न नाट्य समितियों से युवाओं को बुलाया है और वे अपना प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे कलाकार भी शामिल हैं, जो विभिन्न टीवी सीरियल में छोटे-मोटे रोल भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह मंच इन कलाकारों को अनुभव के साथ-साथ कुछ कमाने का एक अवसर भी होता है। औसतन वे हर कलाकार को प्रतिदिन दो हजार रुपये तक का भुगतान करते हैं।

चूंकि, चुनावी मौसम में सभी राजनीतिक दल नुक्कड़ नाटकों का सहारा लेते हैं, ऐसे समय में कलाकारों की मांग बढ़ जाती है। निर्मल रतनलाल वैद की टीम में इस समय 300 कलाकार जुड़े हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर वे दूसरे राज्यों से भी कलाकारों को बुलाकर इस तरह के नुक्कड़ नाटक आयोजित कराते हैं। उन्होंने कहा कि इसका बहुत अच्छा असर पड़ता है और जनता उनकी बात को बेहतर ढंग से ग्रहण करती है।

बेहद चुनौतीपूर्ण है ये काम

नाट्य कलाकार सीमा सिंह ने बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से विभिन्न नाट्य संस्थाओं से जुड़कर नाटक कर रही हैं। नुक्कड़ नाटकों को लेकर अपना अनुभव बताते हुए उन्होंने कहा कि वे दिल्ली के कई थियेटर से जुड़कर विभिन्न नाटकों को सफलतापुर्वक प्रस्तुत कर चुकी हैं, लेकिन कई मायनों में ये नुक्कड़ नाटक ज्यादा चुनौतीपूर्ण होते हैं। इसका बड़ा कारण होता है कि थियेटर में दर्शक बेहद सभी और शांत होते हैं, उनका पूरा ध्यान भी आपकी तरफ होता’ है। थियेटर में प्रस्तुत किये गए विषय भी बेहतरीन तरीके से लिखे और दिखाए जाते हैं।

थियेटरों में विभिन्न यंत्रों के जरिये इसमें जान डालने की कोशिश होती है, जबकि सड़कों पर नाटक करते हुए लोगों को अपनी कला से अपनी तरफ खींचना होता है। यहां का दर्शक कलाकारों को भी ज्यादा गंभीरता से नहीं होता है। आसपास का वातावरण भी कोलाहल से भरा होता है और इसी माहौल में आपको अपनी बात कहनी और श्रोताओं को समझानी होती है। उन्होंने कहा कि ज्यादा चुनौतीभरा होने के बाद भी यह लोगों की अपनी भाषा में किसी विषय को समझने का सबसे सशक्त और सबसे सस्ता माध्यम है। यही कारण है कि यह लोगों को काफी पसंद आता है। इसके जरिये कुछ कमाई होना उनके जैसे संघर्ष करने वाले कलाकारों को बड़ा प्रोत्साहन देता है।

नुक्कड़ नाटकों के जरिये इस चुनावी मंच पर प्रदर्शन कर रहे कलाकार रवि सिंह ने अमर उजाला को बताया कि उनकी टीम में नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा के छात्रों के साथ-साथ विभिन्न नाटी संस्थाओं के युवा शामिल हैं। चुनाव के लिए एक महीने के लिए कुछ दूसरे राज्यों के कलाकार भी उनके साथ आये हुए हैं। इनका उद्देश्य जनता के बीच बेझिझक प्रदर्शन करने के लिए स्वयं को तैयार करना होता है।   

 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें