भाजपा उत्तराखंड में नई टीम और नए चेहरे के साथ काम करना चाहती है। इसलिए सरकार का चेहरा बदलने के बाद शुक्रवार को संगठन का भी चेहरा बदल दिया। पार्टी की योजना विधानसभा चुनाव में नई टीम, नए चेहरे और नए तेवर के सहारे बाजी मारने की है। शीर्ष नेतृत्व ने भविष्य में दूसरे दलों से आए असंतुष्टों को तरजीह नहीं देने की भी रणनीति बनाई है।
इसी हफ्ते त्रिवेंद्र सिंह रावत की जगह तीरथ सिंह रावत को सरकार की कमान सौंपने के बाद पार्टी ने संगठन की जिम्मेदारी वंशीधर भगत की जगह मदन कौशिक सौंप दी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह असंतोष को कम करने की रणनीति है। असंतोष को थामने के लिए भाजपा ने संगठन और सरकार दोनों जगह नई टीम बनाने, नए चेहरे को शामिल करने के बाद नए तेवर अपनाने की रणनीति बनाई है।
दूसरे दलों से आए नेताओं को तवज्जो न देने की रणनीति
त्रिवेंद्र की सरकार के दौरान बगावती तेवर अपनाने वालों में ज्यादातर कांग्रेस को छोड़ कर भाजपा में शामिल होने वाले विधायक और मंत्री शामिल थे। ऐसे में नेतृत्व असंतुष्टों के मामले में भी बेहद सतर्क है। सतपाल महाराज के इतर कांग्रेस से आए विधायकों और मंत्रियों के मामले में नेतृत्व खास सतर्कता बरत रहा है। ऐसे नेताओं को ज्यादा तवज्जो नहीं देने की रणनीति है।
राजपूत-ब्राह्मण में सामंजस्य बनाने पर जोर
भविष्य में राज्य सरकार और संगठन का जोर राजपूत और ब्राह्मण बिरादरी के बीच सामंजस्य बिठाने पर होगा। इसके अलावा धार्मिक कामकाज से जुड़ी हस्तियों की नाराजगी दूर करना भी नई सरकार की पहली प्राथमिकता होगी। नेतृत्व ने संगठन और सरकार की जिम्मेदारी संभालने वाले कौशिक और तीरथ को इस संदर्भ में खास हिदायत दी है।
सांसदों को जल्द सौंपी जाएगी जिम्मेदारी
विधानसभा चुनाव जीतने के लिए राज्य के सांसदों को जल्द ही कई तरह की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इन्हें अलग-अलग विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दे कर अभी से उन क्षेत्रों में डेरा डालने का निर्देश दिया जाएगा।