कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली भाजपा दिल्ली की तरह यूपी में भी अब कांग्रेस के मजबूत होने की आस लगा रही है। सपा में चाचा-भतीजा के बीच मचे आपसी झगड़े ने मिशन 2017 के लिए भाजपा की रणनीति को इस कदर बिगाड़ दिया है कि अब पार्टी रणनीतिकारों को अपने सबसे बड़े सियासी दुश्मन के मजबूत होने की आस लगानी पड़ रही है। यूपी की उलझन को साधने के लिए भगवा रणनीतिकार कांग्रेस के मजबूत होने की कामना कर रहे हैं।
भगवा रणनीतिकारों का आंकलन है कि सपा के कमजोर होने से भाजपा की लड़ाई सीधे बसपा के साथ आ जाएगी। ऐसे में उसे मुस्लिमों के एकमुश्त रूप से बसपा के पाले में जाने की आशंका सता रही है। यदि ऐसा हुआ तो भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पहले के चुनावी परिणाम भी यही बताते हैं कि आमने-सामने की चुनावी लड़ाई के बजाय भाजपा को त्रिकोणीय मुकाबला ज्यादा रास आता है।
यही वजह है कि भगवा रणनीतिकार यूपी में कांग्रेस के भी मजबूत होने की कामना कर रहे हैं। यूपी की चुनावी रणनीति से जुड़े संघ के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार कांग्रेस के मजबूत चुनाव लडने से मायावती कमजोर होंगी। अल्पसंख्यक और दलित वोट सीधे बसपा के पाले में जाने के बजाय कांग्रेस के बीच भी बंटेगा।