कैलाश गहलोत अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल थे। लेकिन अचानक ही रविवार को उन्होंने अरविंद केजरीवाल को सबसे बड़ा भ्रष्टाचारी बता दिया। उन्होंने न केवल आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, बल्कि अरविंद केजरीवाल पर 'शीश महल' का भ्रष्टाचार कर जनता को धोखा देने का आरोप भी लगा दिया। बड़ा प्रश्न यही है कि कैलाश गहलोत ने मंत्री रहते हुए आम आदमी पार्टी का साथ क्यों छोड़ दिया? उनके इस्तीफे के पीछे की असली कहानी क्या है?
आम आदमी पार्टी सूत्रों की मानें तो जब से अरविंद केजरीवाल ने जेल से बाहर आने के बाद आतिशी मारलेना को मुख्यमंत्री बनाया था, तभी से पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को परेशानी हो रही थी। पार्टी के बड़े नेता संजय सिंह, गोपाल राय, कैलाश गहलोत के साथ-साथ सौरभ भारद्वाज जैसे नेताओं की उपेक्षा कर आतिशी मारलेना को मुख्यमंत्री बनाना किसी के भी गले नहीं पच रहा था। कई नेता इस निर्णय के खिलाफ थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल के कारण किसी ने कुछ नहीं कहा। लेकिन अंदर की वही बगावत अब खुलकर सामने आ गई है।
यदि अरविंद केजरीवाल ने अपनी पत्नी सुनीता केजरीवाल को मुख्यमंत्री बनाया होता तो पार्टी के अंदर बगावत न होती, हालांकि भाजपा को इससे केजरीवाल पर हमला करने का एक अवसर अवश्य मिल जाता। लेकिन आतिशी को मुख्यमंत्री बनाने से कई नेताओं का धैर्य जवाब दे गया।
पार्टी के कई नेता मानते हैं कि पार्टी पर लगे कई आरोप बेहद गंभीर हैं। इसका पार्टी को नुकसान हो सकता है। अन्य आरोपों को छोड़ भी दें तो शराब घोटाले और शीश महल विवाद में जिस तरह जांच एजेंसियों ने अदालत में सबूत रखे हैं, आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें आने वाले समय में बढ़ सकती हैं। यही कारण है कि कई नेता समय रहते अपना अलग ठिकाना तलाश रहे हैं।
कई और नेता भी छोड़ेंगे साथ
भाजपा सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा कि कैलाश गहलोत और राजकुमार आनंद ने मंत्री पद पर रहते हुए आम आदमी पार्टी को छोड़ा। मेयर के चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी के दस पार्षदों ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार को छोड़ या तो भाजपा के उम्मीदवार को वोट दिया या तो अपना वोट जानबूझकर खराब कर दिया। इसी से साबित होता है कि आम आदमी पार्टी में अब सब कुछ ठीक ठाक नहीं है।
उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में जल्द ही आम आदमी पार्टी के कई और नेता पार्टी छोड़ेंगे। इस बार विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की करारी हार होगी और भाजपा दिल्ली में सरकार बनाएगी। कैलाश गहलोत ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर केजरीवाल का साथ छोड़ा है और कहा है कि केजरीवाल न यमुना साफ कर पाए, न ही वे दिल्ली को साफ शासन दे पाए। इसी से समझ लेना चाहिए कि परिस्थितियां कितनी विकट हैं।