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नोटबंदी के बाद चुनाव में जीतती रही भाजपा, क्या इशारा करते हैं ये चुनाव परिणाम?

Tue, 29 Nov 2016 05:14 PM IST
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : bjp
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नोटबंदी पर विपक्ष सरकार पर जनविरोधी होने का आरोप जरुर लगा रहा है लेकिन इस फैसले के बाद हुए उपचुनावों के परिणाम कुछ अलग कहानी कहते हैं। 
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8 नवंबर को नोटबंदी के फैसले के बाद विपक्ष सरकार पर लगातार यह आरोप लगा रहा है कि उसका फैसला लोगों के विरोध में है। लोग परेशान हो रहे हैं और सरकार पर इसका कोई फर्क नहीं है। इस मसले पर संसद का पूरा शीतकालीन सत्र भेंट चढ़ गया।

नोटबंदी के फैसले के बाद देश में हुए कुछ उपचुनावों और निकाय चुनावों का ट्रेंड देखें तो विपक्ष के जनविरोधी होने के आरोप की हवा निकलती दिखती है। नोटबंदी के फैसले के बाद देश में जहां-जहां चुनाव हुए हैं वहां बीजेपी का प्रदर्शन पहले की तुलना में सुधरा है। हालांकि यह चुनाव बहुत ही स्‍थानीय स्तर के थे लेकिन फिर भी इन चुनावों में बीजेपी की जीत यह संकेत करती है कि नोटबंदी का फैसला बीजेपी के खिलाफ ना जाकर उसके हक में जाता‌ दिख रहा है। 
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नोटबंदी के इस फैसले के बाद कई राज्यों के उपचुनावों के साथ महाराष्ट्र और गुजरात के निकाय चुनाव हुए। इन सभी जगहों पर बीजेपी का प्रदर्शन शानदार है। 

महाराष्ट्र में शानदार बढ़त

नोटबंदी के ऐलान के बाद महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा को जबर्दस्त सफलता मिली। महाराष्ट्र निकाय चुनावों में भाजपा ने 610 सीटें जीती हैं। वहीं सर्वाधिक 52 नगर पंचायत अध्यक्ष भी बीजेपी के चुने गए। इस चुनाव को नोटबंदी के पक्ष में जनता के 'छोटे जनादेश' के रूप में देखा गया। 

महाराष्ट्र के 25 जिलों के 147 नगर परिषदों और 18 नगर पंचायतों के लिए 27 नवंबर को मतदान हुआ था और 28 नवंबर को वोटों की गिनती शुरू हुई। महाराष्ट्र में नगर परिषद की 147 सीटों में 57 पर बीजेपी, 24 पर शिवसेना और 20 पर कांग्रेस की विजयी मिली। नगर परिषद की तरह नगर पंचायत के चुनावों में भी बीजेपी का प्रदर्शन शानदार रहा। नगर पंचायत की 3705  सीटों में से भाजपा ने 610 सीटें जीतीं।  

गठबंधन के साझीदार शिवसेना ने 402 सीटें  मिलीं। तीसरे नंबर पर एनसीपी रही। उसे 482  सीटें मिलीं। कांग्रेस ने 408 सीटों पर जीत हासिल की है। राज ठाकरे की एमएनएस ने 12 सीटों पर कब्जा किया है। बसपा को 4 सीटें और अन्य को 583 सीटें मिली। भाजपा के लिए यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्ष ने नोटबंदी के मुद्दे को इस चुनाव में खूब उठाया था। इन नतीजों से संकेत साफ है कि जनता ने मोदी सरकार की नोटबंदी को समर्थन दिया। हालांकि निकाय चुनाव में भाजपा-शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था जबकि कांग्रेस-एनसीपी अकेले मैदान में उतरी थी।
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अब गुजरात में जीती भाजपा

महाराष्ट्र के बाद गुजरात के निकाय चुनावों में भी बीजेपी का प्रदर्शन अच्छा रहा। यहां भी नोटबंदी के फैसले के बाद चुनाव हुए थे। महाराष्ट्र के बाद गुजरात के निकाय चुनावों में भाजपा ने 32 जिला पंचायत, तालुका पंचायत और नगर पालिका परिषद के लिए हुए उप चुनावों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 23 सीट जीत ली हैं। वहीं कांग्रेस को मात्र 8 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है। मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस का हाल तो सबसे बुरा रहा है। कई जगहों पर भाजपा को एक तरफा जीत मिली। 

इन दो निकाय चुनावों के पहले कई राज्यों में हुए उपचुनावों में भी भाजपा का प्रदर्शन अच्छा रहा। ये सभी चुनाव नोट बंदी के फैसले के बाद ही हुए थे। मध्य प्रदेश एक लोकसभा और एक विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में दोनों ही सीटें भाजपा के खाते में गईं।  मप्र की नेपानगर विधानसभा में भाजपा की जीत का अंतर इस बार बढ़ भी गया। 2013 का विधानसभा चुनाव बीजेपी 22,000 वोट से जीती थी। जबकि इस बार 40,000 वोटों से जीती है यानि जीत के अंतर में 18,000 वोट का इजाफा हुआ।

असम की लखीमपुर की सीट भी भाजपा के खाते में आई। अरुणाचल प्रदेश में भी भाजपा के खाते में जीत आई।  भाजपा को इन चुनावो में मिली जीत इस बात का संकेत कर रही है कि नोट बंदी के इस फैसले का असर फिलहाल भाजपा या मोदी की लोकप्रियता पर नहीं पड़ रहा है। भले ही यह चुनाव छोटे स्तर के हों। 
 
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