भारतीय जनता पार्टी की एनआरआई के बीच पीएम मोदी की लोकप्रियता का चुनावी फायदा उठाना चाहती है। इसके मद्देनजर सरकार ने संसद का मानसून सत्र समाप्त होने के एक दिन पहले ही लोकसभा में लोक प्रतिनिधि संशोधन बिल पारित करा लिया।
इस बिल में एनआरआई को प्रॉक्सी वोट के अधिकार का प्रावधान है। सरकार अगले शीतकालीन सत्र में इसे राज्यसभा से पारित कराने की पूरी कोशिश करेगी।
बिल के कानून बनने के बाद एनआरआई अपने मूल गांव या शहर में किसी भी व्यक्ति को अपने बदले वोट देने का अधिकार दे सकेगा। अब तक यह अधिकार सिर्फ दूर दराज के इलाकों में तैनात सेना और डिफेंस के लोगों को है।
भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसा होने से प्रत्येक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में एनआरआई के औसतन करीब 21000 वोट होंगे। देश में कुल 543 निर्वाचन क्षेत्र हैं।
विदेशों में 1.1 करोड़ एनआरआई
विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में 3.12 करोड़ भारतीय फैले हैं। इनमें तकनीकी तौर पर एनआरआई की संख्या 1.1 करोड़ है। इनके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जबरदस्त लोकप्रियता है।
2014 के बाद प्रधानमंत्री हर एक विदेश यात्रा के दौरान इंडियन डायसपोरा से खासतौर तौर पर संवाद करते रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में हुए चुनावों में हार और जीत का अंतर घटता जा रहा है। ऐसे में नाजुक वक्त में एनआरआई का प्रॉक्सी वोट काफी कारगर साबित हो सकता है।