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अपने सांसदों को 18 समूहों में बांटकर भाजपा ने पाई सफलता, ऐसे बनाई रणनीति

Thu, 01 Aug 2019 02:48 AM IST
Avdhesh Kumar शरद गुप्ता, नई दिल्ली
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jp nadda, narendra modi, amit shah - फोटो : PTI
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सत्रहवीं लोकसभा के पहले ही सत्र में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने रिकॉर्ड तेजी से कामकाज कर सभी को चौंका दिया है। इसके लिए पार्टी की तरफ से अपनाई गई कॉरपोरेट सरीखी शैली जिम्मेदार है, जिसकी मदद से पार्टी अपने सांसदों की ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल करने में सफल हो पा रही है।
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दरअसल, पार्टी ने अपने 303 सांसदों को 18 समूहों में बांटा है। हर समूह में 12 से लेकर 18 तक सदस्य रखे गए हैं। हर समूह का नेतृत्व एक तेजतर्रार सांसद को मिला है, जिसे उप सचेतक का दर्जा दिया गया है। खास बात ये है कि  महिलाओं के समूह का नेतृत्व किसी महिला सांसद को ही दिया गया है।

ये 18 उप सचेतक रोज सुबह 10 बजे संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी और राज्यमंत्री अर्जुनराम मेघवाल के साथ बैठक कर उस दिन की कार्यसूची पर चर्चा करते हैं। इस बैठक में तय किया जाता है कि किस विषय पर कौन सांसद बोलेगा और किस विषय पर पार्टी की क्या रणनीति रहेगी। फिर ये उप सचेतक इस बैठक के फैसलों को अपने-अपने समूह के सदस्यों तक पहुंचाते हैं। 
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इस तरह 303 सांसदों वाली पार्टी का हर सदस्य अपनी जिम्मेदारी से अवगत हो जाता है। यदि किसी सांसद को छुट्टी चाहिए या किसी जरूरी काम से संसद से बाहर जाना है तो भी उसे अपने समूह के उप सचेतक से अनुमति लेनी पड़ती है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन उप सचेतकों से अभी तक सिर्फ एक-दो बार ही मिल पाए हैं, लेकिन संसद के अंदर की रणनीति तैयार करने में इन उप सचेतकों की मदद करने की जिम्मेदारी कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को दी गई है। 

इनमें गृहमंत्री अमित शाह, सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, वन और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर, महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण शामिल हैं। ये सभी नए सांसदों को लगातार मेहनत करने और सदन में बेहतर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए उत्साहित करते रहते हैं।
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इस रणनीति से जहां पार्टी सदन में विपक्षी दलों पर भारी पड़ रही है, वहीं उसे अपने तेजतर्रार सांसदों को पहचानने में भी मदद मिल रही है। इन सांसदों में से ही भविष्य का नेतृत्व तैयार किया जाना है। इसी कारण पार्टी ने समूहों का नेतृत्व करने के लिए अनुभव से ज्यादा तेजतर्रार होने को तरजीह दी है। लॉकेट चटर्जी को इसका उदाहरण माना जा सकता है, जिन्हें पहली बार लोकसभा में पहुंचने के बावजूद उनके समूह में ही मौजूद कई बार की सांसद रमा देवी पर तरजीह देकर उप सचेतक बनाया गया है।

नए सदस्यों को वरीयता

पार्टी की इसी रणनीति का नतीजा है कि पहली बार सांसद चुनी गई लॉकेट चटर्जी को अभी तक 11 बार लोकसभा में बोलने का अवसर मिला है। वे खुद कहती हैं- वरिष्ठ सांसद बताते हैं कि जब वे पहली बार चुन कर आए थे तो उनमें से कई को पूरे कार्यकाल के दौरान 11 बार बोलने का अवसर नहीं मिला था। 

बुधवार को हुए सीट आवंटन में भी लॉकेट को कई वरिष्ठ सदस्यों पर तरजीह मिली है। कभी बांग्ला फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री रहीं लॉकेट तीन वर्ष पहले भाजपा में शामिल हुई थीं। लेकिन पहले दिन से ही वे सड़कों पर संघर्ष करने को लेकर चर्चा में रहीं। लॉकेट को प्रखर हिंदुत्व का पुट लिए ओजस्वी भाषणों के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि लोकसभा में उनके बोलना शुरू करते ही बंगाल की दूसरी पार्टियों के सांसद हंगामा करने लगते हैं।
 
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