फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जींद उपचुनाव समीकरण ने बदली भाजपा की रणनीति, जाट वोटों के विरोध में ध्रुवीकरण ने बढ़ाई चिंता

Tue, 05 Feb 2019 04:20 AM IST
राजेश सैनी हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
विज्ञापन
जींद उपचुनाव - फोटो : ani
विज्ञापन
हरियाणा में हाल ही में हुए जींद विधानसभा सीट के उपचुनाव के नतीजे ने भाजपा को अपनी रणनीति में बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है। उपचुनाव में जाट बिरादरी के पार्टी के पक्ष में न आने और गैर जाट की राजनीति करने वाले बागी भाजपा सांसद राजकुमार सैनी की नई पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (लोसुपा) के बेहतरीन प्रदर्शन ने नेतृत्व को लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव कराने पर नए सिरे से मंथन करने पर विवश कर दिया है। 
विज्ञापन


हरियाणा भाजपा कोर ग्रुप की सोमवार देर रात तक चली बैठक में लोसुपा से निपटने और जाट वोट बैंक मेें सेंध लगाने की रणनीति पर माथापच्ची हुई। इसमें उपस्थित एक नेता ने बताया कि साथ-साथ चुनाव कराने पर नेतृत्व को जाट बिरादरी के एकतरफा खिलाफ जाने का भय सता रहा है।

पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि अगर साथ-साथ चुनाव न हुए तो पार्टी पीएम मोदी की छवि और जाट प्रभाव वाली तीन सीटों पर दमदार प्रत्याशी उतार कर इस बिरादरी में सेंध लगा सकती है। इसके उलट अगर विधानसभा चुनाव भी साथ-साथ हुए तो यह बिरादरी भाजपा के खिलाफ दोनों चुनावों में गोलबंद हो सकती है।
विज्ञापन


बैठक में सैनी की नई पार्टी लोसुपा के प्रदर्शन पर भी मंथन हुआ। जींद उपचुनाव में लोसुपा उम्मीदवार को अप्रत्याशित रूप से इनेलो से ज्यादा 13582 वोट मिले। सैनी की राजनीति गैर जाट वोट बैंक पर केंद्रित है और यह पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ रहा है।

इसलिए भाजपा के कैंप में ज्यादा चिंता है। अगर साथ-साथ चुनाव हुए तो जाट बिरादरी भाजपा के विरोध में रहेगी और गैर जाट बिरादरी का एक बड़ा हिस्सा लोसुपा के साथ चला जाएगा। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व ने साथ-साथ चुनाव पर नए सिरे से विचार करने का मन बनाया।

अब शाह से होगी चर्चा
कोर ग्रुप की बैठक में हुए मंथन और सामने आई राय से प्रदेश के प्रभारी अनिल जैन और चुनाव प्रभारी कलराज मिश्रा जल्द ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को अवगत कराएंगे। एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, बैठक में ज्यादातर सदस्यों की राय अलग-अलग चुनाव कराने की थी, मगर इस पर अंतिम फैसला शाह ही लेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें