BJP on SIR: भाजपा ने एसआईआर प्रक्रिया पर उठाए जा रहे विपक्षी आरोपों को घुसपैठियों के सहारे सत्ता हथियाने की साजिश बताया है। सुधांशु त्रिवेदी ने ममता बनर्जी और राहुल गांधी पर चुनाव आयोग के खिलाफ झूठ फैलाने का आरोप लगाया।
देश में चल रहे विशेश गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। भाजपा ने सोमवार को आरोप लगाया कि टीएमसी और कांग्रेस इसकी प्रक्रिया पर अनावश्यक सवाल उठाकर एक बड़ी साजिश का हिस्सा बन रही हैं। पार्टी का दावा है कि विपक्ष एसआईआर का विरोध करके कथित घुसपैठियों के सहारे सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहा है। भाजपा ने इस मुद्दे पर विपक्ष के रुख को बेहद गंभीर और लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
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भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में मतदाता सूची के एसआईआर की प्रक्रिया बेहद जरूरी है, ताकि कोई भी विदेशी घुसपैठियों के जरिए सत्ता पर कब्जा न कर सके। उन्होंने ममता बनर्जी और राहुल गांधी पर चुनाव आयोग के खिलाफ झूठ और भ्रम फैलाने का आरोप लगाया तथा इसे चुनावी फायदा उठाने की कोशिश बताया।
एसआईआर को रोकने की कोशिश में विपक्ष
त्रिवेदी ने कहा कि ‘इंडी गठबंधन’ के कुछ दल एसआईआर प्रक्रिया को बाधित कर राज्य-स्तर पर पारदर्शी चुनाव को कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने लोगों से कहा कि यदि बीएलओ अधिकारी जानकारी लेने आएं तो उन्हें बंद कर दो। भाजपा नेता ने इसे लोकतंत्र को बंधक बनाने वाला बयान बताया और कांग्रेस से पूछा कि क्या यह संविधान के खिलाफ नहीं है।
बंगाल में बीएलओ को धमकी
भाजपा ने एक अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी कार्यकर्ता जमीर-उल-इस्लाम मुल्ला ने बीएलओ को फोन पर धमकी दी थी। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी एसआईआर को लेकर झूठे आरोप लगा रहे हैं और ममता बनर्जी अपने बयानों के जरिए माहौल भड़का रही हैं। उन्होंने ममता पर तंज कसते हुए कहा कि 2005 में उन्होंने खुद संसद में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा उठाया था, लेकिन अब उसी मुद्दे पर वे उल्टा बोल रही हैं।
प्रदूषण प्रदर्शन में नारेबाजी का आरोप
भाजपा ने विपक्षी दलों पर यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली के इंडिया गेट पर प्रदूषण विरोधी प्रदर्शन में भीड़ ने मारे गए माओवादी नेता मदवी हिड़मा के समर्थन में नारे लगाए। त्रिवेदी ने कहा कि यही लोग पहले भी 2010 की सीआरपीएफ हत्याकांड को लेकर विश्वविद्यालयों में जश्न मना चुके हैं। उन्होंने कहा कि मैकॉले, माओ और मार्क्स की सोच ने ऐसे लोगों के दिमाग को जहरीला किया है और कट्टरपंथी समर्थन लेकर सत्ता में आने का उनका सपना देश के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
आतंकवाद पर भी उठाया सवाल
एक सवाल के जवाब में त्रिवेदी ने कहा कि रेड फोर्ट ब्लास्ट मामले की जांच में सामने आए तथ्य उन दावों को ध्वस्त करते हैं कि आतंकवाद में केवल गरीब या गुमराह लोग शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा प्राप्त लोग भी आतंकी साजिश में शामिल पाए गए हैं और यह समस्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि वामपंथी और तथाकथित सेक्युलरिस्ट ऐसे तत्वों को वैचारिक संरक्षण देते हैं। त्रिवेदी ने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा छद्म सेक्युलरिज्म से है।