लेकिन अमित शाह ने सबसे अधिक बल इस बात पर दिया कि देश के इतिहास में पहली बार कश्मीर में भारत के संविधान की शपथ लेते हुए कोई सरकार बनी है। उन्होंने इसे महाराष्ट्र के सपूत बाबा साहब अंबेडकर के सपनों की जीत बताया। महाराष्ट्र की दलित जातियों के बीच बाबा साहब अंबेडकर के सम्मान का मुद्दा बेहद संवेदनशील है।
इसे ध्यान में रखते हुए भाजपा नेता ने इस बात पर भी व्यंग्य किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपनी चुनावी सभाओं में जिस भारतीय संविधान की प्रति लहरा रहे हैं, वो अंदर से पूरी तरह खाली है। उन्होंने इसे बाबा साहब अंबेडकर का 'अपमान' बताया। हालांकि, कांग्रेस इसे झूठ करार दे चुकी है।
उद्धव ठाकरे पर भी बोला हमला
अमित शाह ने कहा है कि उद्धव ठाकरे ने सत्ता की लालच में आकर कांग्रेस के साथ समझौता किया है। लेकिन वे चाहकर भी कांग्रेस नेता राहुल गांधी से वीर सावरकर या बाला साहेब ठाकरे के बारे में कुछ अच्छे शब्द नहीं कहलवा सकते। राहुल गांधी लगातार वीर सावरकर को कट्टर हिंदुत्व की राजनीति का पोषक बताते हुए उन पर हमला करते रहे हैं, जबकि बाला साहेब ठाकरे की राजनीति हिंदुत्व की राजनीति करते हुए आगे बढ़ी थी। अमित शाह ने दोनों दलों के बीच इसी वैचारिक मतभेद को उभारकर उद्धव ठाकरे को मिलने वाली सहानुभूति पर वार करने की कोशिश की।
एक ट्रिलियन डॉलर की इकॉनॉमी और 25 लाख नौकरियां
भाजपा ने लोकसभा चुनावों से यह सीख लिया है कि केवल भावनात्क मुद्दों के सहारे चुनाव नहीं जीते जा सकते। उसकी यह छाप महाराष्ट्र के विधानसभा संकल्प पत्र पर साफ दिखाई देती है। पार्टी ने पांच साल के शासन में 25 लाख नई नौकरियां देने का भी वादा किया है। पार्टी ने महाराष्ट्र में रिकॉर्ड निवेश लाकर राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का वादा किया है।
हमने निभाया वादा, उद्धव का समझौता जनता ने नहीं किया स्वीकार: भाजपा
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि उद्धव ठाकरे ने सत्ता की लालच में आकर कांग्रेस और एनसीपी से समझौता कर लिया। लेकिन महाराष्ट्र की जनता ने इस अवसरवादी गठबंधन को कभी स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के वैचारिक मतभेद पूरी महाराष्ट्र की जनता जानती है, ऐसे में उनका समझौता कभी स्थाई नहीं हो सकता। वहीं, भाजपा, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के बीच समझौता वैचारिक साम्यता के आधार पर बनाई गई है। इसे नेता ही नहीं, जनता भी स्वीकार करती है, यही कारण है कि इस बार चुनाव में उनकी भारी जीत होगी।