चाहे कर्नाटक चुनावों में पार्टी कार्यकर्ताओं का संबोधन हो या अटल इनोवेशन में चयनित छात्रों के साथ संवाद, प्रधानमंत्री मोदी नमो एप के जरिए ही संवाद को प्राथमिकता दे रहे हैं। जून 2015 को लॉन्च हुए नमो एप को पार्टी सार्वजनिक जुड़ाव के लिए एक मंच के तौर इस्तेमाल करती रही है। नमो एप के जरिए आम आदमी और एनडीए सरकार के साथ सीधे संवाद तो कर ही सकते हैं, साथ ही मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के कामकाज के प्रदर्शन की समीक्षा भी ग्रुप्स में कर सकते हैं।
वहीं कुछ नेता इससे खुश भी हैं। उनका कहना है कि इस एप के जरिए उन्हें पता लग पा रहा है कि लोग उनके कामकाज पर क्या सही और गलत प्रतिक्रिया दे रहे हैं। साथ ही वे दूसरे साथी नेताओं के कामकाज पर भी नजर रख पा रहे हैं। उनका कहना है कि यह एप ट्विटर से ज्यादा सेफ है, क्योंकि ट्विटर पर ऐसे लोगों की तादाद बहुत ज्यादा है, केवल ट्रोल करने में विश्वास रखते हैं और कामकाज को लेकर प्रतिक्रिया देने की बजाय बेवजह की चर्चाओं में लगे रहते हैं। वहीं इस एप में गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी निगरानी की जा रही है।
नमो एप का क्रैश कोर्स
वहीं पार्टी में कुछ ऐसे भी नेता हैं, जिन्हें एप के इस्तेमाल में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा रहा है। उसके पीछे वजह है उनका टेक्नोलॉजी फ्रेंडली न होना। ऐसे लोगों से पार्टी ने कहा कि इस काम में वे आईटी टीम की मदद लें। इसे लेकर हर दूसरे और आखिरी मंगलवार को पार्टी हेडक्वॉर्टर में ओरिएंटेशन प्रोग्राम के तहत एप पर क्रैश कोर्स आयोजित किया जाता है। जिसके बाद से एप पर ऐसे नेताओं की संख्या बढ़ी है जिनका टेक्नोलॉजी में हाथ तंग था। वहीं कुछ मंत्रियों ने भी अपने विभागों के कामकाज का ब्यौरा एप पर भेजना शुरू कर दिया है, ताकि दूसरे नेता भी उनकी उपलब्धियों को देख सकें।
पिछले महीने 14 मई को पार्टी कार्यालय में हुई भाजपा के राष्ट्रीय पदाधकारियों, समस्त प्रदेश अध्यक्षों और संगठन महामंत्रियों की बैठक के बाहर नमो एप के इस्तेमाल की विशेष ट्रेनिंग भी दी गई और यह सिलसिला अभी भी जारी है।