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सपा की रार में भाजपा की निगाहें रामगोपाल के भावी रुख पर

Tue, 25 Oct 2016 01:54 AM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
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रामगोपाल यादव - फोटो : amar ujala
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मुलायम के कुनबे में जारी शह और मात के खेल के बीच भाजपा की निगाहें भावी तस्वीर के पूरी तरह से साफ होने पर टिकी है। पार्टी का मानना है कि फिलहाल इस सियासी नाटक का परदा नहीं गिरा है। पार्टी की निगाहें खासतौर पर सपा से बाहर किए गए वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव पर टिकी हैं, जिनके निष्कासन के फैसले पर पुनर्विचार का संकेत तक नहीं दिया गया। 
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इस बीच भाजपा ने अपनी पार्टी के नेताओं की रामगोपाल से हुई मुलाकात का बचाव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर तीखा हमला बोल कर एक नया सियासी संदेश भी दे दिया। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि रामगोपाल राज्यसभा में सपा के संसदीय दल के नेता हैं। ऐसे में उनका विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात राजनीतिक और सांवैधनिक प्रतिबद्घता है।

विधानसभा चुनाव अभियान का श्रीगणेश बसपा नहीं सपा से मुकाबला बता कर करने वाली भाजपा को सपा में मची महाभारत के अपनी अंतिम परिणति तक पहुंचने का इंतजार है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक मुलायम ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के गले तो मिलवा दिए मगर दिल मिलने की संभावना दूर-दूर तक नहीं दिख रही। ऐसे में निकट भविष्य में यह विवाद अपने नए और पहले से भी भयंकर रूप में सामने आएगा। 
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इसके अलावा सोमवार को मुलायम ने विवाद थामने के लिए बैठकों के दौर का आयोजन तो किया, मगर इस दौरान रामगोपाल के निष्कासन पर कोई चर्चा न कर उनकी घरवापसी पर ग्रहण लगाने के साफ संकेत दे दिए। जाहिर है कि बैठक में खुल कर रामगोपाल का पक्ष लेने वाले अखिलेश और खुद रामगोपाल चुप नहीं बैठेंगे। 
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शिवपाल के भी तेवर कदम पीछे खींचने वाले नहीं हैं

शिवपाल के भी तेवर कदम पीछे खींचने वाले नहीं हैं। चर्चा है कि विवाद के दौरान रामगोपाल ने अखिलेश से नई पार्टी बनाने और इसका गठबंधन रालोद और कांग्रेस से कराने की रणनीति बनाई थी। शिवपाल ने इस आशय की जानकारी मुलायम को मुहैया कराई थी।

चूंकि महाभारत जारी है और इसके फिलहाल जारी रहने का अंदेशा है। ऐसे में भाजपा को लड़ाई के अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने का इंतजार है। हां, इसी बीच भाजपा ने रामगोपाल का बचाव कर एक नया सियासी संदेश दे दिया है। वह भी तब जब शिवपाल ने खुलेआम रामगोपाल पर भाजपा से हाथ मिला लेने का आरोप लगाया है।

भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि रामगोपाल संसदीय दल के नेता हैं। ऐसे में उनका विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात संवैधानिक और राजनीतिक प्रतिबद्घता है। मुख्य बात यह है कि कभी धरती पुत्र कहे जाने वाले मुलायम पुत्रमोह में घिर गए हैं। वह तय नहीं कर पा रहे हैं कि सत्ता की इस महाभारत में वह पुत्र अखिलेश के साथ रहें या फिर भाई शिवपाल का साथ दें।
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