मुलायम के कुनबे में जारी शह और मात के खेल के बीच भाजपा की निगाहें भावी तस्वीर के पूरी तरह से साफ होने पर टिकी है। पार्टी का मानना है कि फिलहाल इस सियासी नाटक का परदा नहीं गिरा है। पार्टी की निगाहें खासतौर पर सपा से बाहर किए गए वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव पर टिकी हैं, जिनके निष्कासन के फैसले पर पुनर्विचार का संकेत तक नहीं दिया गया।
इस बीच भाजपा ने अपनी पार्टी के नेताओं की रामगोपाल से हुई मुलाकात का बचाव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव पर तीखा हमला बोल कर एक नया सियासी संदेश भी दे दिया। पार्टी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि रामगोपाल राज्यसभा में सपा के संसदीय दल के नेता हैं। ऐसे में उनका विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात राजनीतिक और सांवैधनिक प्रतिबद्घता है।
विधानसभा चुनाव अभियान का श्रीगणेश बसपा नहीं सपा से मुकाबला बता कर करने वाली भाजपा को सपा में मची महाभारत के अपनी अंतिम परिणति तक पहुंचने का इंतजार है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक मुलायम ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के गले तो मिलवा दिए मगर दिल मिलने की संभावना दूर-दूर तक नहीं दिख रही। ऐसे में निकट भविष्य में यह विवाद अपने नए और पहले से भी भयंकर रूप में सामने आएगा।
इसके अलावा सोमवार को मुलायम ने विवाद थामने के लिए बैठकों के दौर का आयोजन तो किया, मगर इस दौरान रामगोपाल के निष्कासन पर कोई चर्चा न कर उनकी घरवापसी पर ग्रहण लगाने के साफ संकेत दे दिए। जाहिर है कि बैठक में खुल कर रामगोपाल का पक्ष लेने वाले अखिलेश और खुद रामगोपाल चुप नहीं बैठेंगे।