केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पॉलीसी को लेकर तमिलनाडु की सियासत में गर्माहट है। इस नीति को लेकर दक्षिण के किनारा करने पर भाजपा ने अपना स्पष्टीकरण करते हुए तमिलनाडु में तीन भाषा नीति लागू करने की अपील की है। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता एएनएस प्रसाद ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में कहीं भी हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है, बल्कि केवल तीसरी भाषा सीखने की सिफारिश की गई है।
एनईपी पर तमिलनाडु में प्रदर्शन, अन्नामलाई ने दी सफाई
साथ ही मामले में
तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने कहा कि इंडिया गठबंधन की पार्टियां केंद्र सरकार के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं, यह आरोप लगाते हुए कि हिंदी को थोपने की कोशिश हो रही है। अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि न तो प्रधानमंत्री मोदी और न ही केंद्र सरकार किसी पर हिंदी थोप रही है। उन्होंने डीएमके और उसके गठबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे बेकार का विरोध कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर आपको हिंदी नहीं चाहिए, तो आप कोई और भाषा सीख सकते हैं। वे छात्रों को यह कहकर भ्रमित कर रहे हैं कि हिंदी थोपी जा रही है। अन्नामलाई ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके छात्रों को भ्रमित कर रही है और नाटक कर रही है।
अन्नामलाई ने राज्य सरकार पर लगाए आरोप
उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों की तुलना में निजी स्कूलों में छात्रों की संख्या अधिक है, जो यह दिखाता है कि राज्य सरकार की शिक्षा नीति विफल रही है। अन्नामलाई ने तमिलनाडु में 100 केंद्रीय विद्यालय लाने की इच्छा जताई और पूछा कि क्या अंबिल महेश पोय्यामोझी केवी स्कूलों के लिए ज़मीन देने के लिए आगे आएंगे? साथ ही अन्नामलाई ने यह कहा कि भाजपा आगामी 2026 के विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति की मांग के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी।
डीएमके पर भाषा की राजनीति का आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने आगे डीएमके पर भाषा की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब यह राजनीति सफल नहीं होगी। प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके, जो अपने नाम में 'द्रविड़' शब्द का इस्तेमाल करती है, तमिलनाडु में द्रविड़ भाषाओं को उनके उचित स्थान से वंचित कर रही है।
भाजपा नेता का सुझाव
प्रसाद ने सुझाव दिया कि सरकार को तमिलनाडु में तीन-भाषा नीति लागू करनी चाहिए, जिससे तेलुगू, कन्नड़ और मलयालम जैसी द्रविड़ भाषाओं को स्कूलों में पढ़ाया जा सके। उनका कहना था कि यह कदम सभी के लिए न्यायसंगत और समावेशी होगा। उन्होंने आगे कहा कि एनईपी केवल संविधान में तीसरी भाषा के रूप में सूचीबद्ध किसी भी भारतीय भाषा को सीखने की सिफारिश करती है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में करीब 25 प्रतिशत लोग तेलुगू बोलते हैं, और यहां कन्नड़ और मलयालम बोलने वाले समुदाय भी महत्वपूर्ण हैं। तीन-भाषा नीति इन समुदायों को अपनी मातृभाषा सीखने का अवसर देगी।