केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के तीन दिन बाद लंबी माथापच्ची और बैठकों के दौर के बीच भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 155 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। पहली सूची की तरह दूसरी सूची में भी एक भी मुसलमान नहीं हैं। पार्टी ने इसके बदले अपना ध्यान पिछड़ा वर्ग में शामिल चुनिंदा जातियों पर केंद्रित किया है। इसके अलावा पार्टी ने स्वघोषित मापदंड से किनारा करते हुए दूसरी सूची में भी नेताओं के रिश्तेदारों और बाहर से आए नेताओं को खुल कर उपकृत करने से परहजे नहीं बरता है।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र पंकज सिंह को नोएडा की विधायक विमला बाथम की जगह टिकट दी गई है। पहले उन्हें साहिबाबाद से लड़ाने की चर्चा थी। इसके अलावा सूची में सांसद हुकुम सिंह की बेटी, सांसद सर्वेश सिंह के बेटे, कल्याण सिंह की बहू, गांधी परिवार के करीबी रहे संजय सिंह की पत्नी गरिमा सिंह और बसपा से भाजपा मेंआए स्वामी प्रसाद मौर्य के पुत्र उत्कर्ष मौर्य को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस से आई रीता बहुगुणा जोशी को लखनऊ कैंट तो बसपा से आए ब्रजेश पाठक को लखनऊ मध्य से उम्मीदवार बनाया है। इसके साथ ही भाजपा ने अब तक 304 उम्मीदवार घोषित कर दिए हैं।
पहली सूची की तरह दूसरी सूची में भी भाजपा ने अपनी पूर्व की रणनीति के अनुरूप ही अगड़ी जातियों (राजपूत-ब्राह्मण-कायस्थ) के साथ चुनिंदा पिछड़ी जातियों (कुर्मी-कुशवाहा, लोध, जाट) पर दांव लगाया है। रविवार को जारी सूची में ढाई दर्जन ब्राह्मण और करीब इतने ही राजपूत-कायस्थ उम्मीदवार हैं। वैश्य बिरादरी को कुछ सीटें देने के अलावा पार्टी ने बाकी बचे टिकट इन्हीं चुनिंदा पिछड़ी जातियों को बांटे हैं।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक महज सांकेतिक तौर पर कुछ सीटों पर मुसलमानों को उतारने के बदले पार्टी ने अपना सारा ध्यान चुनिंदा पिछड़ी जातियों और अगड़ी जातियों पर केंद्रित किया है। चूंकि राज्य में पार्टी वर्षों से सत्ता में नहीं है। ऐसे में संगठन और बड़ा नेता न होने के कारण पार्टी ने दूसरे दलों के चुनिंदा नेताओं को तरजीह दिया है। खासबात यह है कि इन नेताओं को तरजीह दिए जाने में भी सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा गया है।