नड्डा के सामने विधानसभा चुनाव में हार की गुत्थी सुलझाने की बड़ी चुनौती होगी। बीते लोकसभा चुनाव ने साबित किया है कि पीएम मोदी निर्विवाद रूप से देश के सबसे बड़े नेता हैं। बावजूद इसके पार्टी विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रही।
वर्ष 2018 के उत्तरार्ध से पार्टी ने मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और झारखंड की सत्ता गंवा दी है। जबकि पहले तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव के बाद हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने कांग्रेस का करीब-करीब सूपड़ा साफ कर दिया।
नड्डा अध्यक्ष पद के लिए पीएम की पहली पसंद हैं। माना जा रहा है कि बेहतरीन सांगठनिक क्षमता और लो प्रोफाइल रह कर लक्ष्य हासिल करने की नड्डा की कार्यशैली ने पीएम को प्रभावित किया है। विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए नड्डा ने जहां देश के आधे से अधिक राज्यों के प्रभारी पद की जिम्मेदारी संभाली है।
वहीं हिमाचल सरकार और केंद्र सरकार में मंत्री होने के करण उनमें बेहतर प्रशासिनक क्षमता भी है। लोकसभा चुनाव में यूपी में सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद नड्डा ने पार्टी को 80 में से 64 सीटें दिला कर अपनी सांगठनिक क्षमता का लोहा मनवाया।
शाह से अलग कार्यशैली
निर्वमान अध्यक्ष अमित शाह की राजनैतिक शैली बेहद आक्रामक और लक्ष्य के प्रति जुनूनी होने की है। इसके उलट नड्डा की शैली चुप रह कर हर हाल में लक्ष्य हासिल करने की है। नड्डा की अब तक की छवि शांत रह कर मिशन मोड में काम करने की है।