राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के प्रवास के बाद भाजपा प्रदेश इकाई खासी बेचैन है। उनके प्रवास के दौरान पता चला कि पदाधिकारियों ने 19 बिंदुओं को लेकर अब तक प्रचार आरंभ नहीं किया है। पार्टी सांसदों और पार्षदों का संगठन के साथ तालमेल नहीं पाया गया। प्रदेश इकाई का मंडल स्तर पर संगठन भी दुरुस्त नहीं मिला।
इस दौरान भाजपा के 7 में से 5 सांसदों का कार्य संतोषजनक नहीं मिला। उन्होंने लोकसभा चुनाव के संचालन को लेकर न तो समितियों का गठन किया और न ही स्थानीय नेताओं से गंभीर विचार-विमर्श किया। सांसद व प्रदेश महामंत्री के जिला एवं मंडल स्तर के नेताओं से दूरी बनाने का मामला भी सामने आया। मंडलों का गठन करने के मामले में सवाल उठे रहे हैं। इसी तरह, निगम पार्षद भी अपने इलाके के नेताओं से समन्वय स्थापित नहीं कर रहे हैं। इस कारण जिला व मंडलों में नियुक्त पदाधिकारियों में निराशा है।
इन सब मामलों में अमित शाह के नाराजगी जताने के बाद माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव के संबंध में गंभीरता नहीं दिखाने पर प्रदेश इकाई को खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। दरअसल, आलाकमान की नजर में अन्य राज्यों की तरह दिल्ली में संगठन का काम जानदार नहीं है।
दिल्ली के नेता कार्यकर्ताओं से तालमेल बनाने में रुचि नहीं ले रहे पद मिलने के बाद कई नेताओं का व्यवहार ही बदल गया है। इस कारण दिल्ली को लेकर आलाकमान का रुख खासा सख्त है। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में कई नेताओं के समक्ष दिक्कत है। अमित शाह इशारों में इसका संकेत भी देकर गए हैं।