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यूपी में ‘पलायन’ के सहारे ‘कमल’ खिलाने की तैयारी में भाजपा

Sun, 19 Jun 2016 03:42 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,आगरा
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भारतीय जनता पार्टी की कश्ती लहर पर सवार रहती है। वह मंजिल पर भी इन्हीं लहरों के सहारे पहुंची। फिर चाहे ये ‘लहर’ राम मंदिर की हो, हिंदुत्व की या फिर मोदी की। इन ‘लहरों’ पर सवार होकर भाजपा ने केंद्र और राज्य दोनों जगह पर ‘कमल’ खिलाया।
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अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अभी से ऐसी ‘लहर’ तैयारी की जा रही है। मथुरा कांड को तो भाजपा ने हथियार बना ही लिया है, पर्दे के पीछे से पलायन पर सियासत की भी पटकथा तैयार हो रही है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने इस दिशा में प्रदेशभर में नींव रख दी है।

परिवारों का किसी एक क्षेत्र से विस्थापन एक दिन या एक वजह से नहीं है। फिर भी हिंदुओं के विस्थापन को हवा देने से भाजपा के गढ़ मजबूत होंगे। अप्रत्यक्ष रूप से इसकी जिम्मेदारी विहिप निभा रहा है। कम से कम अपने जिले में तो यह मुद्दा गुल खिला सकता है।
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जिले की नौ विधानसभा सीटों में से अधिकांश पर बहुजन समाज पार्टी या भाजपा का कब्जा रहता है। कुछ अपवादों को छोड़ दें तो सपा के लिए यह जमीन बंजर ही है। वर्ष 2012 में नौ में से छह सीट बसपा, दो भाजपा और एक सपा की थीं।

सपा की सीट महेंद्र अरिदमन की व्यक्तिगत जीत मानी जाती है। इससे पहले वर्ष 2002 के चुनाव में भी बसपा की छह, भाजपा की दो और जनता मोर्चा की एक सीट थी। हालांकि 1996 के चुनाव में भाजपा के चार, बसपा के दो, जनता दल का एक, कांग्रेस का एक और एक निर्दलीय विधायक जीते।

जिले में लड़ाई बसपा और भाजपा के बीच ही रही है। दोनों का वोट बैंक भी लगभग एक ही है। जानकारों की मानें तो ऐसे में भाजपा ने हिंदुत्व के मुद्दे को हवा देकर बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी की है। बता दें कि विहिप भी उसी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा है, जिससे भाजपा संचालित होती है। राजनीति पंडितों की मानें तो हिंदुत्व के लिए विहिप जो भी कार्य कर रही है, उससे भाजपा की जड़ें ही मजबूत होंगी।
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