पार्टी के प्रवक्ता और एससी/एसटी वर्ग से आने वाले पूर्व सांसद विजय सोनकर शास्त्री कहते हैं कि दलितों और भाजपा का साथ पुराना है। संघ अपने जन्म से ही पंचनिष्ठा के नियम का पालन कर रहा है। हां इतना जरूर है कि पिछले दिनों दलितों को लेकर भाजपा की छवि खराब करने की कवायद हुई है। उसके देखते हुए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के दिशा-निर्देशन पर हम सजगता से आगे बढ़ रहे हैं।
बाहरी दिल्ली से चयनित भाजपा के दलित सांसद उदित राज कहते हैं कि दलित एकमात्र ऐसा वोट बैंक है, जो किसी भी एक्शन पर तुरंत रिएक्शन देता है। सबसे ज्यादा वोट करते हैं। लिहाजा उन्हें वरीयता देना स्वागत योग्य कदम होगा। यह भाजपा की छवि पर लगे दाग को कितना धूमिल कर पाता है, यह कहना थोड़ा कठिन होगा।
ऐसे रहेगा अहम दांव
- छत्तीसगढ़ में लगभग 31.76 फीसदी से ज्यादा दलित और आदिवासी हैं।
- राजस्थान में दलित 17 फीसदी हैं, लेकिन जाट, पिछड़े व अन्य अल्पसंख्यक मिलाकर लगभग 50 फीसदी वोट हो जाती है
- किसी भी राज्य में ये 50 फीसदी आंकड़ा चुनावी बिसात की दिशा बदल सकता है।
- मध्य प्रदेश में भी 230 सीटों में 82 सीटों पर दलित शह और मात तय करने की स्थिति में हैं।