मदुरै हाईकोर्ट ने मंगलवार को तिरुप्परनकुंद्रम पहाड़ी पर दीप जलाने की अनुमति दे दी है। इस फैसले को भारतीय जनता पार्टी ने भक्तों की जीत बताया है। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कोर्ट के फैसले से स्पष्ट हो गया है कि सत्तारूढ़ दल डीएमके हिंदुओं के खिलाफ काम करती है।
तमिलनाडु के मदुरै स्थित थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीपम जलाने की परंपरा को लेकर चल रहा विवाद अब सियासी रूप ले चुका है। मद्रास हाईकोर्ट द्वारा दीपथून में दीप जलाने की अनुमति को बरकरार रखने के फैसले पर भाजपा ने इसे श्रद्धालुओं की जीत बताया है। इस फैसले के बाद भाजपा ने डीएमके सरकार पर सनातन धर्म के खिलाफ होने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है।
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मदुरै की थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर भगवान मुरुगन से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा के तहत दीप जलाया जाता रहा है। इस वर्ष दीपम जलाने पर रोक लगाए जाने के बाद श्रद्धालु अदालत पहुंचे थे। मद्रास हाईकोर्ट के एकल न्यायाधीश जी.आर. स्वामीनाथन ने 1 दिसंबर 2025 को अपने आदेश में दीप जलाने की अनुमति दी थी। बाद में राज्य सरकार इस आदेश के खिलाफ अपील में गई, लेकिन मदुरै पीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखा।
भाजपा का डीएमके पर सीधा आरोप
दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि डीएमके सरकार लगातार सनातन धर्म का उपहास और अपमान करती रही है। उन्होंने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को खत्म करने की टिप्पणी की थी। गोयल ने कहा कि कुछ ही महीनों बाद भगवान कार्तिकेय और भगवान मुरुगन से जुड़े पर्वत पर दीप जलाने पर रोक लगा दी गई, जिसे संयोग नहीं कहा जा सकता।
सरकार की अपील पर सवाल
पीयूष गोयल ने कहा कि श्रद्धालुओं को अदालत जाना पड़ा और न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला दिया। इसके बावजूद राज्य सरकार का उस आदेश के खिलाफ अपील में जाना डीएमके की हिंदू-विरोधी सोच को दिखाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन और डीएमके के अन्य नेता लगातार सनातन धर्म पर हमले करते रहे हैं। भाजपा का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक परंपरा का नहीं, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता का है।
श्रद्धालुओं को राहत, सियासत तेज
मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीपम जलाने की सदियों पुरानी परंपरा जारी रहेगी। भाजपा ने इसे हिंदू श्रद्धालुओं की जीत बताया है। वहीं, इस फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में नए सिरे से धार्मिक और वैचारिक बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर डीएमके और भाजपा के बीच सियासी टकराव और तेज होने के संकेत हैं।