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कानों देखी: क्या प्रधानमंत्री के हनुमान चाहत होगी पूरी; भाजपा की रूह को कितनी राहत देंगे पंकज चौधरी?

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BJP Flag - फोटो : अमर उजाला
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बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने उम्मीद का दरवाजा तोड़कर सफलता पाई है। अब अप्रैल 2026 में बिहार से राज्यसभा में पांच सदस्यों को आना है। इसे लेकर उठापटक अभी से शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को दिल्ली में थे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उनके साथ उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह भी थे। केंद्री मंत्री चिराग पासवान अपनी मां रीना को संसद के उच्च सदन में भेजना चाह रहे हैं। जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। दोनों अपना दावा फिर से जता रहे हैं। भाजपा के खाते में तमाम पार्टी के ही दावेदार हैं और  दो सीट पर जदयू का भी दावा बनता है। आगे क्या होगा ये देखना दिलचस्प होगा। 
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कफ सिरप कांड से मचा तूफान
उत्तर प्रदेश में ‘कफ सिरप कांड’का तूफान है। तो बाहुबली नेताओं ने इसके मैदान को बड़ा रोचक बना दिया है। जांच भी उत्तर प्रदेश सरकार की एजेंसी के अलावा केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी कर रहा है। अफसरों ने पहले ही बता दिया है कि ‘कोडीन’कफ सिरप से किसी की मौत नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ने भी विधानसभा में इसी लाइन को आगे बढ़ा दिया।  ‘महालक्ष्मी’ने कई घरों में अपनी चमक बिखेरी है। दरअसल इस मामले में घिसट रहे एक पूर्व सांसद के लखनऊ स्थित आवास पर भव्य महालक्ष्मी पूजन की रोशनी ने कई आंखों को चुंधिया दिया था। इसके राजनीतिक निहितार्थ भी खूब निकले। इसी बीच यह मामला भी लाइम लाइट आ गया। 

भाजपा की रूह को कितनी राहत दे पाएंगे पंकज चौधरी?
उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष ‘राहत रूह’ तेल कंपनी के प्रमोटर और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी हैं। कुर्मी समाज से आते हैं और सात बार के सांसद हैं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सब पता है। यह भी पता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कुर्मी, कोइरी, कुशवाहा, पटेल और मौर्या वोटर ने थोड़ा गच्चा दे दिया था। ऐसे में भाजपा को पता है कि पंकज चौधरी, ओबीसी नेता कमाल करेंगे। अखिलेश यादव ने भी नई पहल तेज कर दी है और ऐसे में देखना होगा कि दिल्ली से ‘पॉवर’ लेकर लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर उतरे चौधरी भाजपा को कितनी राहत दे पाते हैं।
 
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असम और पश्चिम बंगाल में क्या होगा?
असम में असमिया और पश्चिम बंगाल में बंगाली अस्मिता। दोनों राज्यों में दोनों मुख्यमंत्री इसी दांव पर चुनाव का ध्रुवीकरण करने में जुट गए हैं। असम के हिमंता बिस्वा सरमा को कांग्रेस के सारे दांव आते हैं। कांग्रेस के नेता गौरव गोगोई के लिए इस बार कसम कड़ी परीक्षा की तरह है। कांग्रेस की टीम को बांध पाने में गौरव को पसीना आ जा रहा है। हिमंता हैं कि टीएमसी की नेता को भी काफी इज्जत देते हैं। इतना ही नहीं विपक्ष के नेताओं को भी कभी निराश नहीं करते। वह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को भरोसा दे रहे हैं कि इस बार 70 पार रहेंगे। यही हाल पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का भी है। ममता चाहती हैं कि असम और बंगाल में कांग्रेस पूरी मजबूती से लड़े। भाजपा के रणनीतिकार इन दिनों ममता का यह कांग्रेस प्रेम देखकर हैरान हैं।  सोनिया गांधी के जन्मदिन पर ममता ने भी बधाई देने के बहाने अपना संदेश दे दिया है। अब देखिए आगे क्या होगा? 
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