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Explainer: भाजपा की 65 पदाधिकारियों की टीम में कितने नए चेहरे, मालवीय-तेजस्वी सूर्या समेत कौन बाहर; मायने क्या

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 17 Aug 2026 06:12 PM IST

सार

भाजपा की नई 65 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम का एलान। अमित मालवीय, तेजस्वी सूर्या समेत कई बड़े चेहरों की छुट्टी। वहीं स्मृति ईरानी, विनोद तावड़े और नए पदाधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी। जानें पुरानी टीम से कितनी अलग है नई टीम।
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भाजपा की नई टीम में क्या बदलाव? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों की नई टीम का एलान हो गया है। नितिन नवीन की अध्यक्षता वाली पार्टी ने सोमवार को कुल 65 सदस्यीय नई टीम का एलान किया। नए पदाधिकारियों में कई चौंकाने वाले बदलाव हुए हैं। जहां लंबे समय से भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष पद से अमित मालवीय को हटाकर दीपक म्हस्के को लाया गया है, वहीं युवा मोर्चा टीम के प्रमुख पद से तेजस्वी सूर्या की विदाई हुई है और अब उनकी जगह हेमांग जोशी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आइये जानते हैं कि भाजपा के पदाधिकारी स्तर पर क्या-क्या बदलाव हुए हैं? कौन से पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है? इसके अलावा किन नए चेहरों को पार्टी संगठन में जगह दी गई है? भाजपा के इन बदलावों के क्या मायने हैं? आइये जानते हैं
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भाजपा की नई टीम में क्या बदलाव? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारियों की नई टीम का एलान हो गया है। नितिन नवीन की अध्यक्षता वाली पार्टी ने सोमवार को कुल 65 सदस्यीय नई टीम का एलान किया। नए पदाधिकारियों में कई चौंकाने वाले बदलाव हुए हैं। जहां लंबे समय से भाजपा के आईटी सेल के अध्यक्ष पद से अमित मालवीय को हटाकर दीपक म्हस्के को लाया गया है, वहीं युवा मोर्चा टीम के प्रमुख पद से तेजस्वी सूर्या की विदाई हुई है और अब उनकी जगह हेमांग जोशी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आइये जानते हैं कि भाजपा के पदाधिकारी स्तर पर क्या-क्या बदलाव हुए हैं? कौन से पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है? इसके अलावा किन नए चेहरों को पार्टी संगठन में जगह दी गई है? भाजपा के इन बदलावों के क्या मायने हैं? आइये जानते हैं

पहले जानें- भाजपा के पदाधिकारी स्तर पर क्या बड़े बदलाव हुए?

1. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के स्तर पर?

राष्ट्रीय उपाध्यक्षों की नई सूची में पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन और अनुभव का समन्वय करने की कोशिश की है। भाजपा ने इस बार कुल 13 उपाध्यक्ष घोषित किए हैं। अगर पहले और अब के पदाधिकारियों के हिसाब से विश्लेषण किया जाए तो सामने आता है कि 12 पुराने उपाध्यक्षों में से केवल चार को बरकरार रखा गया है, जबकि नौ नए चेहरों को शामिल किया गया है।

भाजपा की नई कोर टीम। - फोटो : अमर उजाला
संगठनात्मक बदलाव का विश्लेषण: पुरानी सूची से सरोज पांडे, डीके. अरुणा, एम. चूबा आओ, अब्दुल्ला कुट्टी, लक्ष्मीकांत बाजपेई और लता उसेंडी को हटा दिया गया है। सौदान सिंह को उपाध्यक्ष पद से स्थानांतरित कर राष्ट्रीय सह-महामंत्री (संगठन) बनाया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार राकेश शुक्ल ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि भाजपा की यह नीति रही है कि उपाध्यक्ष और महामंत्री जैसे वरिष्ठ पदों पर मझे हुए और अनुभवी चेहरे रखे जाते हैं। उसने यह परंपरा पहले की तरह ही बरकरार रखी है। वसुंधरा राजे के उपाध्यक्ष बने रहने पर उन्होंने कहा कि राजस्थान की राजनीति से सिंधिया को अलग नहीं किया जा सकता। भाजपा ने भजन लाल जी को मुख्यमंत्री बनाने का प्रयोग किया, लेकिन पिछले तीन वर्ष में बतौर मुख्यमंत्री वे बहुत प्रभावी नहीं रहे। आज भी वसुंधरा राजे राजस्थान में मजबूत हैं। ऐसे में उनके समर्थकों में नाराजगी न फैले, इसलिए भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद पर बनाए रखा।


2. राष्ट्रीय महासचिव और संगठन के स्तर पर

पार्टी ने संगठनात्मक पदों पर अपनी कोर टीम को और अधिक मजबूत करने की कोशिश की है। राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) के पद पर बी.एल. संतोष को बरकरार रखा गया है।

राष्ट्रीय महासचिव (संगठन): बीएल. संतोष पद पर बने हुए हैं।

राष्ट्रीय सह-महामंत्री (संगठन): शिवप्रकाश पद पर बरकरार हैं। इसके अलावा सौदान सिंह को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष से हटा कर अब  राष्ट्रीय सह-महामंत्री (संगठन) की भूमिका सौंपी गई है।

भाजपा की नई कोर टीम। - फोटो : अमर उजाला
पूर्व राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को अब राष्ट्रीय कार्यालय प्रभारी की नई भूमिका में स्थानांतरित किया गया है, जो संगठन के आंतरिक प्रबंधन के लिए अहम बताई गई है। 

दूसरी ओर राष्ट्रीय महासचिव के तौर पर स्मृति ईरानी को लाने पर राकेश शुक्ल ने बताया कि उनके पास महिला मोर्चा अध्यक्ष और पूर्व पदाधिकारी के रूप में काम करने का बेहतरीन अनुभव है, साथ ही उन्हें सरकारी कामकाज का भी लंबा अनुभव है। भाजपा को संगठन में एक तेजतर्रार महिला चेहरे की जरूरत थी, इसलिए उन्हें फिर से मुख्यधारा की राजनीति में लाया गया है।


3. राष्ट्रीय सचिव स्तर पर बड़े बदलाव

राष्ट्रीय सचिवों के वर्ग में भाजपा ने लगभग पूरी तरह संगठन में बदलाव किया है। इस बार कुल 16 राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किए गए हैं, जिनकी पहले संख्या 11 थी। इन सभी चेहरों में से सिर्फ एक चेहरे को छोड़कर बाकी सभी को बदल दिया गया है। भाजपा के इस कदम पर.शुक्ल ने कहा कि राष्ट्रीय सचिव के पद पर हमेशा नए चेहरों को अवसर दिया जाता है, ताकि उनके कामकाज का मूल्यांकन हो सके और वे संगठनात्मक रूप से परिपक्व हो सकें। परिपक्व होने के बाद भविष्य में उन्हें आगे की भूमिकाओं के लिए तैयार किया जाता है। 

दूसरी तरफ भाजपा ने पहले के राष्ट्रीय सचिवों में से केवल एक चेहरे-  अनिल एंटनी को बरकरार रखा गया है। इस पर वरिष्ठ पत्रकार राकेश शुक्ल ने बताया कि भाजपा इस समय विशेष रूप से चार राज्यों- ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ओडिशा और बंगाल में पार्टी सरकार बना चुकी है और अब अगला लक्ष्य तमिलनाडु और केरल हैं।

उन्होंने आगे बताया- अनिल एंटनी पूर्व रक्षा मंत्री एके. एंटनी के बेटे हैं और केरल के ईसाई समुदाय में उनका अच्छा प्रभाव है। केरल में ईसाई समुदाय का वोट बैंक बहुत प्रभावी है, इसलिए उनके माध्यम से भारतीय जनता पार्टी केरल में संगठन के विस्तार की योजना लेकर चल रही है।

भाजपा की नई कोर टीम। - फोटो : अमर उजाला
पुरानी सूची के प्रमुख नाम जैसे पंकजा मुंडे, अरविंद मेनन, डॉ. नरेंद्र सिंह, अलका गुर्जर, ओम प्रकाश धुर्वे, कामाख्या प्रसाद तासा, सुरेंद्र सिंह नागर, मनजिंदर सिंह सिरसा और ओम प्रकाश धनकड़ इस बार सूची में स्थान नहीं पा सके हैं। वहीं, ऋतुराज सिन्हा को सचिव पद से हटाकर प्रकोष्ठ संकुल सह-संयोजक की नई जिम्मेदारी दी गई है।


4. कोषाध्यक्ष और कार्यालय प्रबंधन में भी बदलाव

वित्तीय और प्रशासनिक प्रबंधन के उच्च पदों पर पूरी तरह से बदलाव किया गया है।

राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष: राजेश अग्रवाल की जगह पीयूष गोयल की नियुक्ति हुई है।

राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष:  नरेश बंसल के स्थान पर राजेश मंगल को जिम्मेदारी दी गई है।

राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री: पूर्ववर्ती कार्यालय सचिव महेंद्र कुमार के स्थान पर अब महेंद्र पांडे को राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री नियुक्त किया गया है।


5. पूरी तरह से बदल दिया भाजपा ने मोर्चों का चेहरा

भाजपा ने अपने सातों मोर्चों के नेतृत्व में 100% का बदलाव किया है। यह संगठन से जुड़े पुनर्गठन का सबसे निर्णायक हिस्सा रहा।

भाजपा की नई कोर टीम। - फोटो : अमर उजाला

6. विशेष प्रकोष्ठ और मीडिया विभाग को दिया गया विस्तार

मीडिया और संचार रणनीति को प्रभावी बनाने के लिए विभाग का विस्तार करते हुए कई नई नियुक्तियां की गई हैं।

(i) मीडिया-सोशल मीडिया विभाग
मीडिया संयोजक: अनिल बलूनी पहले की तरह पद पर बने रहेंगे।

मीडिया सह-संयोजक: विभाग में तीन नए सह-संयोजक - आशीष उषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव शामिल किए गए हैं। वहीं, डॉ. संजय मयूख को हटा दिया गया है।

सोशल मीडिया संयोजक: अमित मालवीय की जगह पर अब दीपक म्हस्के को नियुक्त किया गया है।

सोशल मीडिया सह-संयोजक: चार नए नामों की नियुक्ति की गई है। इनमें प्रीति गांधी, शिवानंद द्विवेदी, आलोक भट्ट, अरुण यादव शामिल हैं। 

(ii) नॉर्थ ईस्ट और प्रकोष्ठ संकुल
नॉर्थ ईस्ट संयोजक: डॉ. संबित पात्रा 

नॉर्थ ईस्ट सह-संयोजक: राजीव बब्बर

प्रकोष्ठ संकुल संयोजक: विष्णु दत्त शर्मा 

प्रकोष्ठ संकुल सह-संयोजक: ऋतुराज सिन्हा और विष्णु वर्धन रेड्डी।

क्या हैं भाजपा की ओर से संगठन में किए गए इन बदलावों के मायने?

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक राकेश शुक्ल ने भाजपा के कुछ अहम कदमों पर भी बात की...

1. आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय और सभी मोर्चों में बदलाव क्यों?

शुक्ल ने कहा, "पिछले कुछ समय से अमित मालवीय के सोशल मीडिया संभालने पर सवाल उठ रहे थे। जिसकी वजह से सरकार और पार्टी का मजबूत पक्ष जनता के सामने उभरकर नहीं आ पा रहा था। यह उनके आईटी सेल से हटने का कारण हो सकता है।"
 

राकेश शुक्ल, वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक। - फोटो : अमर उजाला
2. लाल सिंह आर्य की पदोन्नति और दुष्यंत कुमार गौतम को हटाने पर
राकेश शुक्ल के मुताबिक, दुष्यंत गौतम को एक दलित चेहरे के रूप में स्थापित कर पार्टी ने उनकी हैसियत से ज्यादा अवसर (जैसे विधानसभा चुनाव लड़ाना, राज्यसभा देना, मोर्चा पदाधिकारी और अंत में महामंत्री बनाना) दिए थे। लेकिन उनके रहने से पार्टी को कोई बड़ा लाभ नहीं हुआ, बल्कि उत्तराखंड में एक कांड के बाद उनके कारण पार्टी की छवि पर बुरा असर पड़ा। इसी छवि के नुकसान की वजह से उन्हें हटाकर मध्य प्रदेश के लाल सिंह आर्य को नए दलित चेहरे के रूप में लाया गया है।

भाजपा की नई टीम में मध्य प्रदेश का दबदबा - फोटो : अमर उजाला

भाजपा की नई टीम से जुड़ी और अहम बातें


23 राज्यों और छह धर्मों के नेता टीम का हिस्सा

  • नई नियुक्तियों में देश भर के 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रतिनिधित्व दिया गया है ताकि देश के भौगोलिक परिदृश्य और क्षेत्रीय बारीकियों का ध्यान रखा जा सके।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र से तीन क्षेत्रीय नेताओं (त्रिपुरा, असम और नगालैंड) को शामिल किया गया है। पूर्वोत्तर के लिए नॉर्थ-ईस्ट कोआर्डिनेशन सेल सक्रिय रखा गया है, जिसके प्रमुख डॉ. संबित पात्रा हैं।
  • संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए 12 अनुभवी महिला नेताओं को वरिष्ठ संगठनात्मक भूमिकाओं में नियुक्त किया गया है।
  • समिति में चार जनजातीय (एसटी) प्रतिनिधियों (पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और पूर्वोत्तर से) को शामिल किया गया है, जिनमें से दो महिलाएं हैं।
  • उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश से कुल तीन अनुसूचित जाति (एससी) के सदस्यों को टीम में जगह दी गई है।
  • इसके अलावा टीम में हिंदुओं के अलावा दो ईसाई, एक सिख, एक मुस्लिम, एक जैन और एक पारसी को शामिल किया गया है।

शासन-प्रशासन के कितने अनुभवी नेता

  • टीम में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों वसुंधरा राजे, तीरथ सिंह रावत और बिप्लव कुमार देव को शामिल किया गया है।
  • चार ऐसे नेताओं को टीम शामिल किया गया है, जिनके पास पूर्व में केंद्र का प्रशासनिक अनुभव है। साथ ही एक मौजूदा केंद्रीय मंत्री भी टीम में हैं।
  • लोकसभा और राज्यसभा के 18 सांसद भी इस राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बनाए गए हैं।


शैक्षणिक और पेशेवर पृष्ठभूमि

इसके अलावा भाजपा की नई टीम में दो प्रोफेसर, पीएचडी धारक, मौजूदा समय में प्रैक्टिस कर रहे चार डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) और वकील जैसे पेशेवर लोग भी शामिल हैं।
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