संसद में अहम मौकों पर सांसदों की गैरहाजिरी से सरकार की किरकिरी जैसी स्थिति
बजट सत्र के दौरान नहीं आएगी। शीत सत्र से ही संसदीय राजनीति की शुरुआत करने वाले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लोकसभा और राज्यसभा के व्हिप को सांसदों की अलग-अलग प्रतिदिन की रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया है। शाह शीत सत्र के दौरान हुए फ्लोर मैनेजमेंट से बेहद निराश हैं।
सत्र के दौरान तीन तलाक बिल, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने संबंधी बिल में संशोधन को निरस्त करने के लिए लाए गए अहम बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा में पार्टी के करीब सौ सांसद गैरहाजिर थे। तीन तलाक बिल पर राज्यसभा में भी ऐसी ही स्थिति थी। ओबीसी बिल पर बड़ी संख्या में सांसदों की अनुपस्थिति के कारण मानसून सत्र में विपक्ष राज्यसभा में संशोधन पारित कराने में कामयाब हो गया था।
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सूत्र बताते हैं कि शाह ने संसदीय कार्य मंत्री और राज्य मंत्रियों की टीम के समक्ष नाराजगी जताई और दोनों सदनों के व्हिप के जरिए प्रभार वाले राज्यों के सांसदों की प्रतिदिन की रिपोर्ट तैयार कराने के निर्देश दिए। शाह ने नरेंद्र मोदी एप को डाउनलोड न करने और इस पर सक्रिय न रहने वाले, पीएम की इच्छा के अनुरूप अपने अपने संसदीय क्षेत्र के विभिन्न क्षेत्रों के 20 विशेषज्ञ युवाओं की सूची न भेजने वालों की भी सूची तैयार कर उन्हें कारण बताओ नोटिस भी देने का निर्देश दिया है।
पार्टी सूत्रों ने यह भी बताया कि 29 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र से पहले सांसदों को अनुपस्थित रहने या लापरवाही दिखाने के प्रति आगाह किया जाएगा। सांसदों को स्पष्ट तौर पर बताया जाएगा कि व्हिप द्वारा तैयार रिपोर्ट भी आगामी लोकसभा चुनाव में टिकट मिलने या न मिलने का एक बड़ा आधार होगा।