बिस्ता ने ट्वीट किया, आज मैंने पूर्व राज्य मंत्री और एसएमसी के पूर्व मेयर अशोक भट्टाचार्य और सिलीगुड़ी के विधायक को दिवाली की बधाई देने के लिए उनके आवास पर बुलाया। मेरे साथ सिलीगुड़ी के विधायक डॉ. शंकर घोष और अन्य जिला व मंडल कार्यकर्ता भी थे।
उत्तर बंगाल में भाजपा के दो सांसदों और माकपा के एक नेता के बीच हुई बैठक से टीएमसी खेमे में खलबली मच गई है। हालांकि, भगवा पार्टी नेतृत्व और माकपा के असोक भट्टाचार्य ने तमाम दावों और अटकलों को खारिज किया और कहा कि यह केवल एक शिष्टाचार भेंट थी।
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भाजपा के दार्जिलिंग से सांसद राजू बिस्ता ने सोमवार को सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष और पूर्व महापौर भट्टाचार्य के साथ अपने आवास पर मुलाकात की। इसके बाद तुरंत बाध बैठक की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा किया।
बिस्ता ने ट्वीट किया, आज मैंने पूर्व राज्य मंत्री और एसएमसी के पूर्व मेयर अशोक भट्टाचार्य और सिलीगुड़ी के विधायक को दिवाली की बधाई देने के लिए उनके आवास पर बुलाया। मेरे साथ सिलीगुड़ी के विधायक डॉ. शंकर घोष और अन्य जिला व मंडल कार्यकर्ता भी थे।
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वहीं, टीएमसी ने अपने मुखपत्र जागो बांग्ला में अनुमान लगाया था कि यह बैठक दिसंबर तक राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए की जा रही है। बाद में टीएमसी के राज्य महासचिव कुणाल घोष ने कहा, यह सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं है, बल्कि उत्तर बंगाल को अस्थिर करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। भाजपा पिछले विधानसभा चुनावों में अपनी हार के बाद से राज्य को विभाजित करने की कोशिश (केंद्र शासित प्रदेश या अलग राज्य की मांग) कर रही है। हम इस घटिया राजनीति की निंदा करते हैं।
भाजपा के कई सांसदों और विधायक पहले खुले तौर पर बंगाल विभाजन की वकालत कर चुके हैं। उनकी मांग है कि पश्चिम बंगाल से उत्तर बंगाल को अलग करके एक राज्य या एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया जाए।