संसद सदस्यों के रूप में बैठे धनकुबेरों की माली स्थिति का उल्लेख करते हुए गांधी ने कहा है कि संसद के ऐसे सदस्य जिनके पास एक करोड़ रूपये से ज्यादा की संपत्ति है, उनकी संख्या 2009 में 319 थी। आज ऐसे मौजूदा सांसदों की संख्या बढकर 449 हो गई है, जोकि 24 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है। इन सदस्यों ने अपनी संपत्ति 10 करोड़ रूपये से ज्यादा की घोषित की है।
एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉम्स के आंकडे का उल्लेख करते हुए भाजपा सांसद ने लिखा हैं कि 16वीं लोकसभा में प्रति सांसद औसत संपत्ति 14.64 करोड रूपये है। राज्यों के परिषद राज्यसभा में भी 96 प्रतिशत सांसद करोड़पति हैं। नेशनल इलेक्शन वॉच के एक विशलेषण में यह पाया गया कि राज्य सभा के सांसद की औसत समपत्ति 20.12 करोड़ रूपये है।
लोकसभा अध्यक्ष को लिखे खत में उन्होंने सांसदों की वेतन वृद्धि मामलों के लिए एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था की स्थापना की वकालत की है। जो ऐसे फैसले की वहन क्षमता और सांसद की वित्तिय क्षतिपूर्ति की जांच करेगी और इसपर फैसला लेगी। उन्होंने कहा है कि ऐसे कदम से कुछ लोगों को असुविधा होगी, लेकिन समय रूप में इससे प्रतिष्ठान के प्रति लोगों का भरोसा पैदा होगा।
तमिलनाडू और तेलंगाना विधायकों के वेतन वृद्धि पर गांधी ने जताया विरोध
तमिलनाडु और
तेलंगाना विधायकों की वेतन वृद्धि के कदम पर विरोध जताते हुए गांधी ने लिखा है कि वर्ष 2016 में वेतन में 163 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तेलंगाना राज्य के विधायक देश में सबसे ज्यादा भुगतान पाने वाले कानून निर्माता बन गए हैं। तो तमिलनाडू के हालातों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए वरुण गांधी ने लिखा है कि यह प्रदेश लंबे समय से गंभीर कृषि संकट से गुजर रहा है।
बीते वर्ष 2017 में यहां के किसानों ने अपने हाथों में इंसानी खोपडियां लेकर जंतर—मंतर पर प्रदर्शन किया था, मगर विधानसभा ने इन किसानों की सूध लेने के बजाय पूर्ववर्ती प्रभाव से जुलाई 2017 से अपना वेतन दोगुना कर लिया। जबकि इसी राज्य के वीआई मुनुस्वामी पिल्लई ने किसानों की तकलीफ को देखते हुए 1949 में प्रतिदिन पांच रूपये की कटौती लागू की थी जिसे मद्रास असेंबली ने एकमत से पारित कर दिया था। गांधी का कहना है कि देश की जनता यह भरोसा रखती है कि निर्वाचित प्रतिनिधि अपने बजाय देश के श्रेष्ठ हित को सबसे आगे रखेंगे।