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भाजपा सांसद वरुण गांधी ने संपन्न सांसदों से किया सैलरी न लेने का आहृवान

Sun, 28 Jan 2018 10:01 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
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varun gandhi
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राजकीय कोष पर बढ़ रहे बोझ को कम करने की कवायद में भाजपा सांसद वरुण गांधी ने संपन्न सांसदों से 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल में सैलरी न लेने का आहृवान किया है। तो देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के कदम का हवाला देते हुए उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्र महाजन को तीन पन्ने का खत लिखकर उनसे मांग किया है कि वे संपन्न सांसदों के बीच सैलरी न लेने की मुहिम शुरू करें।

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गांधी ने लिखा है कि सभी सांसद अच्छी आर्थिक स्थिति नहीं रखते हैं और कई सांसद अपनी आजीविका के लिए वेतन पर ही निर्भर करते हैं। मगर संसद में आर्थिक रूप से संपन्न सांसदों की संख्या भी कम नहीं है। 

उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि वे आर्थिक रूप से संपन्न सांसदों के बीच 16वीं लोकसभा के बाकी बचे कार्यकाल के लिए अपना वेतन छोड़ देने के लिए एक आंदोलन शुरू करें। इससे निर्वाचित प्रतिनिधियों की संवेदनशिलता को लेकर देशभर में एक सकारात्मक संदेश जाएगा। 
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लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष वरुण ने यह विकल्प भी छोड़ा है कि यदि वेतन छोडने की मांग करना बहुत बड़ी मांग है तो अपनी मर्जी से खुद का वेतन बढ़ा लेने की जगह अध्यक्ष एक नया विमर्श भी पेश कर सकती हैं। जिसमें 16वीं लोकसभा के बचे कार्यकाल के लिए सांसदों के वेतन को बढ़ाए बिना जस का तस रखने का सुझाव है। 

दरअसल वर्ष 1952 में पंडित जवाहर लाल नेहरू की पहली कैबिनेट बैठक में कैबिनेट ने उस समय के देश के आर्थिक हालातों को देखते हुए सर्वसम्मति से एक फैसला लिया था कि वो तीन माह तक अपना वेतन नहीं लेंगें।

पिछले एक दशक में सांसदों के वेतन में हुई 400 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी

सांसदों के वेतन वृद्धि का आंकडा पेश करते हुए वरुण गांधी ने लिखा है कि पिछले एक दशक में सांसदों के वेतन में 400 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है, इतनी बढ़ोत्तरी मुनाफा कमाने वाले नीजि क्षेत्र में भी मुमकीन नहीं लगती है। 

उनका कहना है कि इस देश में मोटेतौर पर सरकार प्रति सांसद प्रतिमाह 2.7 लाख रूपये खर्च करती है। वर्ष 2016 में सिर्फ लोकसभा के 543 सांसदों पर 176 करोड़ रूपये खर्च किए गए। 

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ऐसे सदस्य जिनके पास एक करोड़ रूपये से ज्यादा की संपत्ति

varun gandhi - फोटो : PTI
संसद सदस्यों के रूप में बैठे धनकुबेरों की माली स्थिति का उल्लेख करते हुए गांधी ने कहा है कि संसद के ऐसे सदस्य जिनके पास एक करोड़ रूपये से ज्यादा की संपत्ति है, उनकी संख्या 2009 में 319 थी। आज ऐसे मौजूदा सांसदों की संख्या बढकर 449 हो गई है, जोकि 24 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है। इन सदस्यों ने अपनी संपत्ति 10 करोड़ रूपये से ज्यादा की घोषित की है। 

एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉम्स के आंकडे का उल्लेख करते हुए भाजपा सांसद ने लिखा हैं कि 16वीं लोकसभा में प्रति सांसद औसत संपत्ति 14.64 करोड रूपये है। राज्यों के परिषद राज्यसभा में भी 96 प्रतिशत सांसद करोड़पति हैं। नेशनल इलेक्शन वॉच के एक विशलेषण में यह पाया गया कि राज्य सभा के सांसद की औसत समपत्ति 20.12 करोड़ रूपये है।

लोकसभा अध्यक्ष को लिखे खत में उन्होंने सांसदों की वेतन वृद्धि मामलों के लिए एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था की स्थापना की वकालत की है। जो ऐसे फैसले की वहन क्षमता और सांसद की वित्तिय क्षतिपूर्ति की जांच करेगी और इसपर फैसला लेगी। उन्होंने कहा है कि ऐसे कदम से कुछ लोगों को असुविधा होगी, लेकिन समय रूप में इससे प्रतिष्ठान के प्रति लोगों का भरोसा पैदा होगा। 

तमिलनाडू और तेलंगाना विधायकों के वेतन वृद्धि पर गांधी ने जताया विरोध 
तमिलनाडु और तेलंगाना विधायकों की वेतन वृद्धि के कदम पर विरोध जताते हुए गांधी ने लिखा है कि वर्ष 2016 में वेतन में 163 प्रतिशत की वृद्धि के साथ तेलंगाना राज्य के विधायक देश में सबसे ज्यादा भुगतान पाने वाले कानून निर्माता बन गए हैं। तो तमिलनाडू के हालातों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए वरुण गांधी ने लिखा है कि यह प्रदेश लंबे समय से गंभीर कृषि संकट से गुजर रहा है। 

बीते वर्ष 2017 में यहां के किसानों ने अपने हाथों में इंसानी खोपडियां लेकर जंतर—मंतर पर प्रदर्शन किया था, मगर विधानसभा ने इन किसानों की सूध लेने के बजाय पूर्ववर्ती प्रभाव से जुलाई 2017 से अपना वेतन दोगुना कर लिया। जबकि इसी राज्य के वीआई मुनुस्वामी पिल्लई ने किसानों की तकलीफ को देखते हुए 1949 में प्रतिदिन पांच रूपये की कटौती लागू की थी जिसे मद्रास असेंबली ने एकमत से पारित कर दिया था। गांधी का कहना है कि देश की जनता यह भरोसा रखती है कि निर्वाचित प्रतिनिधि अपने बजाय देश के श्रेष्ठ हित को सबसे आगे रखेंगे।
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