राज्यसभा सांसद डा. दिनेश शर्मा
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राज्यसभा सांसद डा. दिनेश शर्मा ने राज्यसभा में शून्य प्रहर के दौरान जल संकट को गंभीर चुनौती बताते हुए इसके समाधान के लिए जल आडिट कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जल संकट अब केवल मौसमी चुनौती ही नहीं, बल्कि एक गंभीर नीतिगत पर्यावरणीय और सामाजिक संकट का रूप ले चुका है। आने वाले समय में यह आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए भी चुनौती बन सकता है। ऐसे में इसके समुचित प्रबंधन के लिए जल का ऑडिट कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश के अनेक भागों में जल संकट बढने लगा है। पानी की कमी का दुष्प्रभाव किसान पर्यावरण और नागरिकों पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने इसके निदान के लिए सरकार को चार महत्वपूर्ण सुझाव दिए है। उन्होंने कहा कि देश में भूजल के दोहन की बडी समस्या है और वर्तमान में भूजल दोहन की दर प्राकृतिक पुर्नभरण की क्षमता से अधिक हो चुकी है। आने वाले समय में समस्या बडा रूप ले सकती है। आज के समय में किसान को सिंचाई के लिए गहरे बोरवेल खोदने के बाद भी सिंचाई के लिए समुचित जल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।
डा शर्मा ने कहा कि देश के बडे शहरों में तो जल संकट विकराल रूप ले रहा है और गर्मियों में लोगों को पानी की व्यवस्था करने में काफी समय और पैसा भी खर्च करना पड रहा है। टैंकर माफिया तमाम स्थानों पर जल संकट की परिस्थिति का लाभ उठाकर लोगों का आर्थिक शोषण भी करते हैं। उन्होंने इस संकट के समाधान के लिए चार महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि सबसे पहले पानी के वितरण की व्यवस्था का सुदृढ नियमन करते हुए टैंकर माफिया पर लगाम लगाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्षा जल संचयन की व्यवस्था को अनिवार्य और प्रभावी बनाया जाए जिससे कि भूजल स्तर फिर से समृद्ध हो सके। जिला स्तर पर जल आडिट प्रणाली लागू की जाए जिससे पानी की उपलब्धता, जरूरत और प्रबंधन का वैज्ञानिक आंकलन हो सके। उनका कहना था कि राज्यों के बीच के जल विवाद के समाधान के लिए केन्द्र सरकार की निगरानी में एक ऐसा तंत्र विकसित किया जाए जिससे समस्या का समयबद्ध समाधान हो जाए।