महाराष्ट्र के औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर कर दिया गया है। 25 अक्तूबर को इसकी आधिकारिक रूप से घोषणा हो चुकी है। नया स्टेशन कोड CPSN होगा। इस बीच भाजपा ने रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर उर्दू में नाम लिखे जाने का विरोध किया है। भाजपा विधायक संजय केनेडर ने मंगलवार को मांग की है कि रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर उर्दू में लिखा गया' छत्रपकि संभाजीनगर नाम हटाया जाए।
रेलवे स्टेशन के बोर्ड से उर्दू नाम हटाने की मांग
भाजपा विधायक संजय केनेकर ने मंगलवार (28 अक्तूबर) को मांग की है कि रेलवे स्टेशन के बोर्ड से उर्दू लिपि में लिखा 'छत्रपति संभाजीनगर' नाम हटाया जाए। महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य केनेकर ने कहा, "जब अधिसूचना में भाषा (उर्दू) का उल्लेख नहीं है, तो बोर्ड पर उस भाषा का उल्लेख क्यों किया जा रहा है?"
उन्होंने आगे कहा कि अधिसूचना में केवल हिंदी, अंग्रेजी और मराठी का ही उल्लेख है। उर्दू में नाम देखकर मैं हैरान रह गया। केनेकर ने कहा, "क्या रेलवे अधिकारी के रिश्तेदार मुगलों के साथ काम कर रहे थे? मैंने उन्हें फोन करके बदलाव करने को कहा।" उन्होंने कहा कि देश ने कई शाही (शाहों के शासन) और अंग्रेजों का सामना किया है, जिन्होंने हमारे इतिहास को मिटाने की कोशिश की। उर्दू में नाम लिखना हम पर निजामी भाषा थोपने की कोशिश है।"
नाम बदलने की अधिसूचना जारी
दरअसल, पिछले हफ्ते सरकार ने तीन साल पहले शहर का नाम बदलने के बाद औरंगाबाद रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर छत्रपति संभाजीनगर स्टेशन करने की अधिसूचना जारी की। यह स्टेशन दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ डिवीजन के अंतर्गत आता है। अब स्टेशन का नाम उर्दू में लिखे जाने का विरोध किया जा रहा है। बता दें कि छत्रपति संभाजीनगर, जो उस समय औरंगाबाद था, 1948 तक हैदराबाद के निजाम की रियासत का हिस्सा था।
एआईएमआईएम ने बीजेपी नेता को घेरा
इधर, उर्दू में नाम रखने के भाजपा नेता के विरोध पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के महाराष्ट्र अध्यक्ष और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि "हम यहां पिट लाइन (रखरखाव ट्रैक) के उद्घाटन की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन वे बोर्ड का उद्घाटन कर रहे हैं। अगर वे (भाजपा) दूसरी भाषाएं नहीं जानते, तो यह उनकी समस्या है। उर्दू नाम का विरोध करने वालों को ध्यान देना चाहिए कि दिल्ली रेलवे स्टेशन, जहां उनके सर्वोच्च नेता बैठते हैं, वहां पंजाबी के साथ-साथ उर्दू नाम भी है।"