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भाजपा का मिशन बिहार: आरसीपी, चिराग, कुशवाहा के बाद अब मांझी पर निगाहें, लव-कुश की जोड़ी तोड़ने की चाहत

Tue, 28 Feb 2023 05:47 AM IST
देव कश्यप हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली।

सार

भाजपा ने चिराग पासवान और कभी नीतीश के करीबी रहे आरसीपी सिंह को साध लिया है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुकेश सहनी से रिश्ते सुधार रही है तो अब दलित वोट बैंक पर एकमुश्त दावा करने के लिए उसकी निगाहें हम के मुखिया और राज्य के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी पर है।
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जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बिहार में जदयू के नाता तोड़ने के बाद लोकसभा चुनाव में मजबूत दमखम दिखाने के लिए भाजपा की रणनीति राजग का आकार बड़ा करने की है। राज्य में पार्टी अलग-अलग जातियों का नेतृत्व करने वाले दलों और नेताओं को साध कर जदयू की कमी की भरपाई में जुट गई है। पार्टी की रणनीति इन नेताओं और दलों के सहारे गैरयादव ओबीसी, सवर्ण और दलित वोट बैंक पर अपना आधार मजबूत करने की है।

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भाजपा इसी रणनीति के तहत राजग के पुराने सहयोगियों को टटोल रही है। इस क्रम में पार्टी उपेंद्र कुशवाहा को जदयू से तोड़ने में सफल रही है। पार्टी ने चिराग पासवान और कभी नीतीश के करीबी रहे आरसीपी सिंह को साध लिया है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के मुकेश सहनी से रिश्ते सुधार रही है तो अब दलित वोट बैंक पर एकमुश्त दावा करने के लिए उसकी निगाहें हम के मुखिया और राज्य के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी पर है।

मांझी से उम्मीद क्यों?
मांझी इस समय सत्तारूढ़ महागठबंधन के साथ हैं, मगर लगातार अपनी नाराजगी भी जाहिर कर रहे हैं। मांझी ने सीएम नीतीश कुमार की समाधान यात्रा की तर्ज पर गरीब संपर्क यात्रा शुरू की। इस दौरान अपने पुत्र संतोष कुमार सुमन को उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से अधिक पढ़ा लिखा बताते हुए उन्हें सीएम बनाने की मांग की। भाजपा सूत्रों का कहना है कि जीवन के अंतिम पड़ाव में मांझी को अपने पुत्र के राजनीतिक भविष्य की चिंता है।
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मंत्रिमंडल विस्तार में दिखेगी योजना
मोदी मंत्रिमंडल का जल्द विस्तार प्रस्तावित है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि इस विस्तार में बिहार के लिए पार्टी की रणनीति की छाप दिखेगी। मंत्रिमंडल में चिराग पासवान और आरसीपी सिंह को जगह मिलने की संभावना है। इसके अलावा भी कई ऐसे निर्णय होंगे, जिसके जरिये राज्य के जातीय गणित को साधा जाएगा। इसके लिए भाजपा राज्य संगठन में भी बड़ा बदलाव करेगी।

राजग का आकार बढ़ाने का मतलब?
राज्य में भाजपा का आधार सवर्णों के साथ अति पिछड़ी जातियों में बढ़ा है। पार्टी चाहती है कि उसका दलित, मल्लाह और कोइरी बिरादरी (27 फीसदी) में प्रभाव मजबूत हो। इसी रणनीति के तहत दलित वोट बैंक में एकाधिकार के लिए पार्टी मांझी को साधना चाहती है। राज्य की 13 लोकसभा सीटों में तीन लाख से अधिक मतदाताओं की संख्या के कारण दलित वोट बैंक अहम है।  कोइरी वोट बैंक के लिए पार्टी ने कुशवाहा को साधा तो मल्लाह वोट बैंक के लिए सहनी से रिश्ते मजबूत कर रही है।

लव-कुश की जोड़ी तोड़ने की चाहत
राज्य में मुख्यमंत्री नीतीश की स्वजातीय कुर्मी बिरादरी चार फीसदी तो कोइरी बिरादरी (लव-कुश) करीब सात फीसदी है। नई सदी के दो दशकों के दौरान इन दोनों बिरादरी में नीतीश का व्यापक प्रभाव रहा है। भाजपा कुशवाहा के सहारे उनके स्वजातीय कोइरी बिरादरी को राजग में लाना चाहती है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर ऐसा हुआ तो महागठबंधन का आधार करीब-करीब राजद के यादव-मुस्लिम आधार तक सीमित रह जाएगा।

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