4 में 1 लोकसभा सीट भाजपा के खाते में
सीट अब 2014
कैराना, उप्र तबस्सुम हसन, रालोद हुकुम सिंह, भाजपा
पालघर, महाराष्ट्र राजेंद्र गावित, भाजपा चिंतामण वनगा, भाजपा
भंडारा-गोंदिया, महाराष्ट्र मधुकर कुकड़े, राकांपा नाना पटोले, भाजपा
नगालैंड तोखेयो येपथोमी, एनडीपीपी नेफ्यू रियो, एनडीपीपी
10 में 1 विधानसभा सीट पर जीती भाजपा
सीट अब पहले
नूरपुर, उत्तर प्रदेश नईमुल हसन, सपा लोकेंद्र सिंह चौहान, भाजपा
जोकीहाट, बिहार शाहनवाज आलम, राजद सरफराज आलम, जदयू
गोमिया, झारखंड बबीता देवी, झामुमो योगेंद्र प्रसाद, झामुमो
सिल्ली, झारखंड सीमा महतो, झामुमो अमित महतो, झामुमो
चेंगन्नूर, केरल सजी चेरियन, माकपा रामचंद्रन नायर, माकपा
पलूस कड़ेगांव, महाराष्ट्र विश्वजीत कदम, कांग्रेस पतंगराव कदम, कांग्रेस
महेशतला, प.बंगाल दुलाल दास, तृणमूल कांग्रेस कस्तूरी दास, तृणमूल कांग्रेस
थराली, उत्तराखंड मुन्नी देवी, भाजपा मगन लाल शाह, भाजपा
शाहकोट, पंजाब हरदेव सिंह, कांग्रेस अजीत सिंह कोहर, अकाली दल
आमपति, मेघालय मियानी डी शीरा, कांग्रेस मुकुल संगमा, कांग्रेस
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव
- फोटो : amar ujala
लंबी छलांग लगाने के लिए आपको दो कदम पीछे हटना पड़ता है। हम निश्चित तौर पर भविष्य में लंबी छलांग लगाएंगे। - राजनाथ सिंह, गृह मंत्री
यह अवसरवाद पर लालूवाद की जीत है। अगर नीतीश कुमार में नैतिकता बची हो तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। - तेजस्वी यादव, राजद नेता
कैराना में जिन्ना पर गन्ना की जीत हुई है। अभी एक साल है, भाजपा को आत्म विश्लेषण करना चाहिए। - जयंत चौधरी, रालोद नेता
यह सरकार के अहंकार की हार है। महंगाई लगातार बढ़ रही है। जनता ने सरकार के खिलाफ मतदान किया। - अखिलेश यादव, सपा प्रमुख
यह पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों की हार है। केंद्र को तत्काल इस पर अंकुश लगाना चाहिए। - केसी त्यागी, जदयू नेता
चुनाव आयोग में फैले भ्रष्टïाचार को देखते हुए मेरे सुझाव है कि चुनाव आयुक्त को नियुक्त करने के बजाय चुना जाना चाहिए। - उद्धव ठाकरे, शिवसेना प्रमुख
जीत के मायने
उपचुनावों के नतीजों से साफ है कि एकजुट विपक्ष 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा पर भारी पड़ सकता है। वहीं, विपक्ष अभी खत्म नहीं हुआ, बल्कि अभी भी असली मुद्दों के साथ जनता में उसकी जमीन मौजूद है।
हार के मायने
भाजपा पर अति-आत्मविश्वास भारी पड़ा। उपचुनावों के नतीजों ने स्पष्टï कर दिया कि सिर्फ बोलने या वादे करने से काम नहीं चलेगा। मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए जमीन पर काम करना होगा। ऐसे फैसले लेने होंगे जो सीधे आम मतदाता को फायदा पहुंचाए।