भाजपा आलाकमान पंजाब में अध्यक्ष पद तय करने के मामले में बुरी तरह उलझता दिखायी पड़ रहा है। नेतृत्व ने केंद्रीय संगठन से जुड़े एक वरिष्ठ नेता को इस पद की कमान देने का मन बनाया था, मगर इसी बीच उक्त नेता के निजी सचिव पर लगे ड्रग तस्करी के आरोपों ने आलाकमान को उलझन में डाल दिया है।
संबंधित नेता के विरोधी खेमे ने उनके खिलाफ आलाकमान के समक्ष शिकायतों का अंबार लगा दिया है। आलाकमान को जानकारी दी गई है कि संबंधित वरिष्ठ नेता ने अपने निजी सचिव को पावर ऑफ अटार्नी भी दे रखी थी। चूंकि पंजाब में इस बार नशे का कारोबार सबसे प्रमुख चुनावी मुद्दा है, इसलिए आलाकमान नहीं चाहता कि अध्यक्ष पद की ताजपोशी होते ही विपक्ष खासतौर पर आम आदमी पार्टी इसे मुद्दा बनाए।
गौरतलब है कि पंजाब भाजपा के कुछ और नेताओं पर परोक्ष रूप नशे के कारोबार में शामिल होने के आरोप लगे हैं। गौरतलब है कि पंजाब भाजपा के एक खेमे ने आलाकमान के समक्ष फिरोजपुर जिले के एसपी की ओर से होशियारपुर के एसएसपी को लिखे पत्र की प्रति उपलब्ध कराई है, जिसमें एक सांसद के निजी सचिव की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। पत्र में कहा गया है कि निजी सचिव सहित 17 लोगों के संबंध नशे के सौदागरों से हैं।
उक्त खेमे ने एक अन्य कागजात नेतृत्व को सौंपा है जिसमें सांसद ने अपनी संपत्ति बेचने केलिए निजी सचिव को पावर और अटार्नी दिया है। शिकायत के पुलंदे में निजी सचिव के खिलाफ इस मामले में छपी खबरों की कतरने भी शामिल की गई है।
पंजाब के लिए रणनीति बनाने की जिम्मेदारी संभालने वालों में से एक वरिष्ठ केंद्रीय नेता ने कहा कि पहले से ही विधानसभा चुनाव के नशे के कारोबार पर केंद्रित होने के बाद मिली इस तरह की सूचना परेशान करने वाली है। नेतृत्व इसी महीने होने वाले राज्यसभा की एक सीट पर चुनाव के बाद राज्य की स्थिति का नए सिरे से मंथन करेगा। इससे पहले अब राज्यसभा सीट के लिए माथापच्ची होगी। पार्टी नेतृत्व किसी दागदार छवि के साथ चुनाव मैदान में उतरने से परहेज बरतेगा।