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राम भरोसे हैं राम मंदिर की लड़ाई लड़ने वाले भाजपा नेता

Wed, 26 Apr 2017 04:45 AM IST
विनोद अग्निहोत्री / अमर उजाला, नई दिल्ली
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अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन की लड़ाई लड़ने वाले लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विनय कटियार आदि भाजपा नेता अब अदालत में अपनी लड़ाई भी राम भरोसे ही लड़ेंगे। पार्टी ने अधिकृत रूप से उन्हें कानूनी प्रक्रिया के भरोसे छोड़ दिया है। पार्टी नेतृत्व की राय है कि इन सारे नेताओं को अदालत से ही बरी होकर आना चाहिए।
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पार्टी नेतृत्व के इस रुख से भाजपा और संघ परिवार में मंदिरवादी नेता खासे असहज हैं। उनका सवाल है किक्या राम मंदिर आंदोलन की लड़ाई इन नेताओं की निजी थी? क्या अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण भाजपा का एजेंडा नहीं है? अयोध्या में बाबरी मस्जिद या विवादित ढांचा विध्वंस की घटना के दौरान भाजपा के ये सभी बतौर पार्टी नेता वहां मौजूद थे या अपनी निजी हैसियत से वहां गए थे?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 24 नेताओं पर आपराधिक षड्यंत्र रचने का मुकदमा चलाए जाने और दो साल के भीतर उसका फैसला करने के आदेश के बाद भाजपा के भीतर खासी उथलपुथल है। पिछले सप्ताह बुधवार को इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई पार्टी कोर ग्रुप की बैठक में यह तय किया गया कि ये सभी नेता अदालती प्रक्रिया का सामना करते हुए इस मामले से बाहर निकलें। वही उचित होगा।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आडवाणी और जोशी खामोश हैं, लेकिन केंद्रीय मंत्री उमा भारती और पूर्व सांसद डा. रामविलास वेदांती बेहद मुखर हैं। उमा डंके की चोट पर कह रही हैं कि उन्हें अयोध्या में विवादित ढांचा तोड़े जाने का कोई मलाल नहीं है।

इसके लिए वह जेल जाने, मंत्री पद छोड़ने और फांसी पर लटकने को तैयार हैं। वेदांती का कहना है कि अयोध्या में विवादित ढांचा उन्होंने ही तुड़वाया। लेकिन विनय कटियार लालू यादव के ‘साजिश’ वाले बयान से सुर में सुर मिला रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कानूनी उलझन में फंसे एक भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जिस मामले में पार्टी के दो पूर्व अध्यक्ष और एक केंद्रीय मंत्री शामिल हों, पार्टी द्वारा उसे सिर्फ कानूनी प्रक्रिया के भरोसे छोड़ देना समझ में नहीं आता है। यह आंदोलन किसी नेता की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं थी और न ही कोई इसमें निजी हैसियत से जुड़ा था।

आडवाणी की रथ यात्राएं भाजपा का कार्यक्रम था। छह दिसंबर 1992 को कार सेवा के लिए सभा भाजपा नेता और कार्यकर्ता पार्टी के आदेश और कार्यक्रम के तहत अयोध्या में विवादित स्थल पर गए थे। लेकिन अब पार्टी ने इनसे एक तरह से अपना पल्ला सा झाड़ लिया है। आडवाणी, जोशी और अन्य सभी नेताओं को अपनी कानूनी लड़ाई व्यक्तिगत स्तर पर ही लड़नी पड़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित भाजपा नेता इससे भी आहत हैं कि अदालत के आदेश के बाद जिस तरह उन्हें पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं का समर्थन मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। यहां तक कि पार्टी के कोर ग्रुप की बैठक में इस मुद्दे पर क्या तय हुआ इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।

बल्कि अखबारों में खबर लीक हुई और उससे उन्हें पता चला कि पार्टी का क्या रुख है। पार्टी के किसी बड़े नेता ने इन नेताओं से निजी तौर मिलकर बात भी नहीं की है। अब ये नेता खुद ही अपने वकीलों से राय मशविरा करके आगे की लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।
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